Saturday, July 20, 2024

कानन पेंडारी जू में ‘रजनी’ की मौत:ATR में 8 महीने पहले घायल हालत में मिली थी बाघिन, उम्र हो जाने के चलते मौत का दावा

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बिलासपुर के कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क में वन्य प्राणी दिवस से ठीक एक दिन पहले बुधवार को ‘रजनी’ नाम की बाघिन की मौत हो गई। उसे आठ माह पहले अचानकमार टाइगर रिजर्व से रेस्क्यू कर लाया गया था। तब से यहां उसका इलाज चल रहा था। उपचार में आठ लाख रुपए खर्च करने के बाद भी प्रबंधन उसे नहीं बचा पाए। कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क में 18 दिन के भीतर तीसरे वन्य प्राणी की मौत हुई है। इससे पहले 12 फरवरी को गर्भवती मादा हिप्पो और चार दिन पहले भालू की मौत हो गई थी।

अचानकमार टाइगर रिजर्व के छपरवा सांभर धसान सर्किल के बरमान नालाल के रूम नंबर 356 RF में 8 जून 2021 को बाघिन घायल अवस्था में मिली थी। उसे रेस्क्यू कर कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क में रखा गया था और उसका इलाज किया जा रहा था। उसके कंधे में गहरा जख्म लगा था और पूंछ में भी चोट आई थी। बाघिन अपने पैरों पर ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी। ऐसे में पिछले 8 माह से उसके कानन पेंडारी के पशु चिकित्सालय में रखा गया था।

बताया गया कि बुधवार की सुबह 8.45 बजे उसके शरीर का तापमान सामान्य से बहुत कम हो गया और 11.26 बजे उसकी मौत हो गई। वन विभाग के अफसरों ने उसके शव का पोस्टमार्टम करने के लिए टीम गठित की। जिसमें डॉ.आर.एम.त्रिपाठी, डॉ. अनूप चटर्जी, डॉ. राम ओत्तलवार और कानन पेंडारी के पशु चिकित्सक अजीत पांडेय के साथ डॉ. तृप्ति सोनी ने बाघिन के शव का पोस्टमार्टम किया। फिर शव को परिसर में ही जला दिया गया। उसके बिसरा जांच के लिए लैब भेजने के लिए सुरक्षित रखा गया है।

उम्र दराज होने से बाघिन की मौत का दावा
बताया जा रहा है कि बाघिन की मौत उम्र दराज होने से हुई है। कानन प्रबंधन ने इस बाघिन की फोटो भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून, उत्तराखंड के राष्ट्रीय डाटाबेस से मिलान किया था। इसमें इस बाघिन का जन्म 2009 में बांधवगढ़ के टाइगर रिजर्व होना बताया गया था। साथ ही इस बाघिन ने 2013 और 2015 में क्रमशः: 2 और 3 शावकों को जन्म भी दिया था। ऐसे में अफसरों ने बाघिन की उम्र तकरीबन 13 वर्ष बताया है। दावा किया गया है कि उसके दांतों में भी घिसाव हो गया था। डॉक्टरों के अनुसार एक बाघ जंगल में औसत 12 से 14 वर्ष ही जिंदा रहता है।

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