Tuesday, July 23, 2024

क्रांतिकारी लागुड़ का 108 साल बाद आज अंतिम संस्कार हुआ:अंग्रेजों ने खौलते तेल में डलवा दिया था, स्कूल में पढ़ाई के लिए रखा था कंकाल

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अंबिकापुर और झारखंड में अंग्रेजों से लोहा लेने वाले शहीद क्रांतिकारी लागुड़ का 108 साल बाद शुक्रवार को अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग एकजुट हुए। अस्थियों के रूप में बचे उनके पार्थिव शरीर को पारंपरिक बाजे के साथ श्मशान घाट ले जाया गया। जहां पर विधिविधान से दाह संस्कार हुआ। अस्थियां पूरी तरह से नहीं जल सकीं। इसके बाद परिजनों ने उन्हें समाज की परंपरा के अनुसार सामरी में दफनाया।

नगेसिया समाज के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा। लागुड़ नागेसिया की शव यात्रा के दौरान आदिवासी वाद्ययंत्रों के साथ उनको विदाई दी गई। शवयात्रा के दौरान समाज की महिलाओं, पुरुष और युवतियों ने पूरे मार्ग पर फूल बरसाए। लागुड़ के अंतिम संस्कार में जनप्रतिनिधि, आदिवासी समाज के नेता, परिवार व आसपास के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रशासन की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया।

स्कूल में कैद मिला था शहीद का कंकाल
अंग्रेजी हुकूमत से लड़ने वाले शहीद लुगड़ा का कंकाल अंबिकापुर के सबसे पुराने स्कूल में रखा था। आदिवासी समाज के लोग अंतिम संस्कार के लिए उनके परिजन को देने की मांग कर रहे थे। स्कूल में छात्रों को पढ़ाने को लेकर कंकाल रखने की बात कही गई थी। दैनिक भास्कर ने इस संबंध में 2 दिन पहले खबर प्रकाशित की थी। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने अंतिम संस्कार के आदेश प्रशासन को दिए। शुक्रवार को 300 जवानों की ड्यूटी भी इसमें लगाई गई।

बच्चों को पढ़ाने की बात पर समाज ने उठाया था सवाल
समाज के लोगों का कहना था कि साल 1913 में जब कुसमी इलाके के लागुड़ नगेसिया शहीद हुए, तब स्कूल भवन में इतनी बड़ी पढ़ाई भी नहीं होती थी कि वहां किसी का कंकाल रखकर सिखाया जाए। शासकीय मल्टी परपज स्कूल के प्रिंसिपल एचके जायसवाल का कहना था कि स्कूल के लैब में कंकाल रखा हुआ था। उसका ढांचा टूट गया है, इसके बाद उसे प्रिजर्व करके रखा है। मेरी जानकारी में उसका उपयोग स्टडी के लिए नहीं हो रहा है।

 

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