Monday, July 15, 2024

पोर्न देखकर बच्चों ने किया रेप:6 बच्चों ने 8 साल की बच्ची से डेढ़ माह तक किया दुष्कर्म

Children raped after watching porn: 6 children raped an 8-year-old girl for one and a half months

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cgtimesnews.com/ छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में 8 साल की बच्ची से दुष्कर्म का डराने और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यह दुष्कर्म उस बच्ची के साथ किसी बाहरी ने नहीं उसी के परिवार के 6 नाबालिग लड़कों ने किया। ये नाबालिग लड़के उसके चचेरे भाई और दूसरे करीबी रिश्तेदार हैं और इनकी उम्र 6 से 13 साल की है। बाद में इनका एक नाबालिग दोस्त भी इसमें शामिल हो गया। पहले पीड़ित बच्ची के परिजनों ने रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन शुक्रवार शाम को बच्ची की मां-दादी परिवार के दबाव में रिपोर्ट वापस लेने गांधीनगर थाने पहुंच गए। जहां से उन्हें पुलिस ने वापस भेज दिया।

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परिजनों ने पुलिस को बताया कि ये सभी मोबाइल में अश्लील वीडियो देखकर उसके साथ करीब पिछले डेढ़ महीने से रेप कर रहे थे। परिजनों को इस बात की जानकारी तब लगी, जब लड़की को दर्द होना शुरू हो गया और उसने पूरे मामले की जानकारी अपनी मां को दी। गांधीनगर क्षेत्र में रहने वाली लड़की की जॉइंट फैमिली है। इसी वजह से परिवार के सभी बच्चे हमेशा साथ में खेला करते थे। ये सब कुछ कब हुआ पता ही नहीं चला। परिजनों के बार-बार पूछताछ में इस बात की जानकारी लगी कि ये सब कुछ डेढ़ महीने से चल रहा था। लड़की के परिजनों ने गुरुवार को इस मामले में शिकायत की थी। गांधीनगर टीआई अलरीक लकड़ा का कहना है कि केस दर्ज कर लिया गया है। जांच के बाद कार्रवाई करेंगे।

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बच्चों के पास जो मोबाइल उसमें मिले अश्लील वीडियो

परिजनों ने पुलिस को एक मोबाइल भी दिया है, जिसे आरोपियों में सबसे बड़ा 13 साल का लड़का रखता था। उसमें पुलिस को ढेरों अश्लील वीडियो मिले हैं। इंटरनेट के जरिए पोर्न साइट्स पर जाने की लिंक मिली है। दूसरे बच्चे भी इस मोबाइल से ये वीडियो देखते थे। इन लोगों ने सबसे छोटे 6 साल के बच्चे को भी ये वीडियो दिखाया और उससे ऐसा करने को कहा।

परिजनों ने ऑनलाइन क्लास के लिए दिए थे

पुलिस पूछताछ में परिजनों ने बताया कि बच्चों को मोबाइल ऑनलाइन क्लास के नाम पर दिया था। फिर उस मोबाइल पर किसी ने नजर नहीं डाली। संयुक्त परिवार में बहुत बच्चे होने के कारण यह भी ध्यान नहीं दिया कि बच्चे मोबाइल में क्या देख रहे हैं। क्या कर रहे हैं। एक-दूसरे से सभी के घर पास में होने के कारण कभी बच्चे कुछ देर नहीं भी दिखे तो किसी ने गंभीरता से नहीं लिया।

डेढ़ महीने से ऐसा होना और पता नहीं चलना आश्चर्यजनक

पुलिस का कहना है कि मामला गंभीर था और संवेदनशील भी इसलिए तुरंत FIR की। परिजनों के बयान लिए। आरोपी बच्चों को बुलाया। बच्ची से बात की। अभी भी हम परिजनों से पूछताछ कर रहे हैं, लेकिन बस एक बात आश्चर्यजनक लग रही है कि यह सब डेढ़ माह से चल रहा था तो किसी को कुछ मालूम कैसे नहीं हुआ। इस पर पुलिस पूरी संवेदनशीलता से काम करेगी। सभी संबंधित लोगों से बात कर सच्चाई मालूम करेगी। मामला बच्चों, नाबालिगों से जुड़ा है, इसलिए पुलिस इसमें अपनी कार्रवाई का पूरा ब्यौरा नहीं दे रही है। ऐसा लगता है कि पुलिस आरोपी सभी सातों बच्चों को शनिवार को संबंधित न्यायालय में पेश करेगी।

एसपी बोले- केस वापस लेने का सवाल ही नहीं, बच्चों पर कानून के तहत कार्रवाई

अंबिकापुर एसपी अमित तुकाराम का कहना है कि शुक्रवार को बच्ची के परिजन आए थे। वो चाहते थे कि परिवार का मामला है, इसलिए केस वापस ले लिया जाए, लेकिन हमने उन्हें बता दिया कि ऐसा नहीं हो सकता। ये बेहद गंभीर मामला है। एफआईआर हो चुकी है और सब कुछ स्पष्ट है, लिहाजा ऐसे मामलों में नाबालिगों के लिए जो कानून है उसके तहत कार्रवाई होगी। सभी नाबालिग आरोपियों को शनिवार को बुलाया गया है। उन्हें संबंधित न्यायालय में पेश किया जाएगा।

किशोर होते बच्चों को यौन मामलों में क्या गलत क्या सही बताना चाहिएः डाक्टर साहू

रायपुर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉक्टर साहू इस पूरे मामले को 11-12 साल के बच्चों की साइकोलॉजी से जोड़ते हैं। वे कहते हैं कि इस केस में जरूर पहल करने वाला लड़का 11 से 13 साल का होगा। इस उम्र में हारमोनल चेंज होता है। बच्चे वो बातें जानना चाहते हैं जो उनके सामने ढंके-छिपे रूप में होती हैं। इसमें सबसे प्रमुख है सेक्स। यह टीवी, फिल्म, खबरों और दूसरे माध्यम से उनको दिखता तो है, लेकिन इसका पूरा ज्ञान उनको नहीं रहता। हमारे यहां बच्चों को सेक्स एजुकेशन का कोई जरिया नहीं है, लिहाजा वो जो देख लेते हैं उसे गलत नहीं मानते। उन्हें लगता है कि वो भी ऐसा करके देखें। उन्हें किसी ने बताया ही नहीं है कि कब, क्या करना है। क्या गलत है क्या सही। दूसरा ऐसे मामलों में सबसे जरूरी है कि बच्चे मोबाइल में क्या देख रहे हैं इस पर माता-पिता की नजर रहे। आज ऑन लाइन क्लासेस के कारण हर बच्चे के हाथ में इंटरनेट के साथ मोबाइल है और उसमें सब है, हमारे पास सेंसर करने का कोई जरिया नहीं है इसलिए यह खतरा तो बना ही हुआ है।

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