Tuesday, July 23, 2024

मदनवाड़ा कांड की रिपोर्ट विधानसभा में पेश:आयोग ने कहा, IPS मुकेश गुप्ता घटना स्थल के पास बुलेटप्रूफ कार में बैठे रहे, पर कुछ भी नहीं किया

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करीब 12 साल पहले राजनांदगांव जिले के मदनवाड़ा में हुए नक्सली हमले का एक सच बुधवार को सार्वजनिक हो गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जस्टिस शंभुनाथ श्रीवास्तव न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में रख दी। इस रिपोर्ट में 12 जुलाई 2009 को हुई मुठभेड़ की परिस्थितियों और रणनीतिक गलतियों का खाका पेश किया है। आयोग ने निलंबित IPS मुकेश गुप्ता की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

आयोग की रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है, यह बहुत दु:खद स्थिति है कि आईजी जोन की उपस्थिति में नक्सलियों ने एक शहादत पाए एसपी और दूसरे पुलिसकर्मियों के शवों से बुलेट प्रूफ जैकेट, जूते, हथियार और दूसरी चीजें निकाल लीं। कुछ गवाहों ने दावा किया है कि उन्होंने नक्सलियों पर गोली चलाई, लेकिन उसका कोई प्रभाव नहीं हुआ। यह देखने में अविश्वसनीय लगता है, या तो उन्होंने नक्सलियों पर फायर ही नहीं किया या फिर वे पूरे समय लक्ष्य को दुर्लक्ष्य कर रहे थे। यह कोई बहादुरी नहीं है कि आप नक्सलियों के सामने खामोश दर्शक बनकर खड़े रहे। अगर पुलिस ने नक्सलियों पर गोली चलाई होती तो उनकी तरफ के लोग भी हताहत हुए होते। यह स्वीकृत तथ्य है कि उस मुठभेड़ में नक्सलियों की ओर से किसी की मौत नहीं हुई।

आयोग ने कहा है, अगर कमांडर/आईजी जोन ने बुद्धिमता पूर्ण कृत्य किया होता तो या साहस दिखाया हाेता तो नतीजा बिल्कुल अलग आता। उसके पास पर्याप्त समय था कि वह सीआरपीएफ अथवा सीएएफ को बुलाकर उनका उपयोग कर सकता था। आयोग ने दर्ज किया है, ऐसा प्रतीत होता है कि वह भी अपने जीवन के लिए डर रहा था। ठीक उसी समय उसने एसपी विनोद चौबे को नक्सलियों से मुकाबला करने के लिए अग्रिम हमले में ढकेल दिया। यह स्पष्ट रूप से साक्ष्य में आया है कि आईजी जोन (मुकेश गुप्ता) अपनी बुलेटप्रूफ कार में बैठा रहा। उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया जैसा कि उसके पुरस्कार के उद्धरण में लिखा गया है।

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