Monday, July 15, 2024

यूक्रेन में फंसे भारतीय स्टूडेंट्स,कीव में यूक्रेन आर्मी ने भारतीय छात्रों पर बंदूक तानी; स्टेशन पहुंचे तो ट्रेन में बैठाने से इनकार किया

- Advertisement -

यूक्रेन में रूस की बमबारी के बीच ऑपरेशन गंगा शुरू करके भारत सरकार ने वहां फंसे भारतीय छात्रों को निकालना शुरू कर दिया है। अभी भी हजारों भारतीय छात्र यूक्रेन के विभिन्न शहरों में फंसे हैं और घर वापसी की जद्दोजहद में लगे हैं। बॉर्डर की ओर जाने का प्रयास कर रहे छात्रों पर यूक्रेन आर्मी ने बंदूक तक तान दी थी। बिहार का एक युवक पैदल ही पोलैंड के लिए निकल गया है। भास्कर ने यूक्रेन में फंसे भारतीयों से बात की…

राजस्थान के सीकर की रहने वाली स्टूडेंट डॉ. श्रृद्धा चौधरी ने बताया कि एम्बेसी ने हमसे कहा कि रेलवे स्टेशन पर जाएं। करीब 300 बच्चे कीव के रेलवे स्टेशन गए। 60 बच्चे तो किसी तरह यूक्रेन के वेस्टर्न हिस्से में पहुंच गए, लेकिन कई लोगों को ट्रेन में नहीं बैठाया गया। जब स्टूडेंट्स को ट्रेन नहीं मिली और वे वापस एम्बेसी जाने लगे तो बीच रास्ते में यूक्रेन आर्मी ने उन्हें रोककर उन पर बंदूक तान दी। जब वे वापस एम्बेसी आए तो घुसने से मना कर दिया गया। एम्बेसी जबरन उन्हें शेल्टर होम से बाहर भेजने की कोशिश कर रही है।

भागलपुर के शुभम् पैदल की पोलैंड के लिए निकल पड़े। टरनोपिल से पोलैंड बॉर्डर की यात्रा शुभम् के लिए आसान नहीं थी। पोलैंड के लिए 40 किलोमीटर वे पैदल चले। शुभम् ने बताया कि जैसे ही पता चला कि यहां से पौलेंड की ओर निकलना है। सुबह 4:30 बजे से प्राइवेट गाड़ी से वह पोलैंड की ओर निकल पड़े। लेकिन, बार्डर से 40 किलोमीटर पहले से गाड़ियों की लंबी लाइन लगी थी। इस कारण गाड़ी वाले ने आगे जाने से मना कर दिया, इसलिए वे पैदल ही निकल गए।

पालटोवा यूनिवर्सिटी में बिजनेस मैनेंजमेंट के छात्र कपूरथला के अकर्ष ढींगरा ने बताया- कड़ाके की ठंड, हर तरफ बर्फ और माइनस दो डिग्री तापमान में भारत आने के लिए यूक्रेन के बॉर्डर वाले इलाके में जा रहे हैं। ठंड के कारण उनके पांव तक खराब हो गए हैं, लेकिन फिर भी अपने साथियों के साथ कीव से निकल नाटो क्षेत्र अलवीव की तरफ निकला है। उन्होंने कहा कि वहां पर भारतीय दूतावास किसी तरह की कोई मदद नहीं कर रहा है। बिस्किटों के सहारे छात्र अपना सफर कर रहे हैं।

- Advertisement -
Latest news
- Advertisement -
Related news
- Advertisement -