Monday, July 22, 2024

यूक्रेन में फंसे CG के छात्रों का दर्द:वापस लौटे युवक ने बोला; महंगी हो गई फ्लाइट,टिकट मिल नहीं रही;राज्य सरकार से मदद की अपील

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छत्तीसगढ़ से यूक्रेन में पढ़ने वाले छात्रों के लौटने का सिलसिला जारी है। बिलासपुर लौटने वाले छात्र से बात की और यूक्रेन में फंसे छत्तीसगढ़ के स्टूडेंट्स का हाल जाना। उसने बताया कि यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने अब स्टूडेंट को वापस जाने कहा है। ऐसे में छात्र अपने घर लौटने के लिए परेशान हैं। इधर, अपने बच्चों के सुरक्षित लौटने को लेकर पैरेंट्स भी परेशान हैं। लेकिन, उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि इस हालात में क्या करें।

बिलासपुर के कुदुदंड में रहने वाला छात्र ऋषभ शुक्ला यूक्रेन के कीव में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। उसने बताया कि उसने पहले ही टिकट बुक करा लिया था। युद्ध के हालात को देखते हुए भारतीय दूतावास के एडवाजरी जारी करते ही उनके पैरेंट्स अलर्ट हो गए और फ्लाइट का टिकट करा लिया। वह 32 हजार रुपए में फ्लाइट की टिकट लिया था। लेकिन, अब स्थिति ज्यादा खराब हो गई है। स्टूडेंट्स को फ्लाइट की टिकट ही नहीं मिल रही है। जिन फ्लाइट्स की टिकट मिल रही है। वह काफी महंगी है। स्थिति यह है कि फ्लाइट की टिकट 50-60 हजार तक पहुंच गई है। ऐसे में स्टूडेंट के लिए टिकट का खर्चा उठाना मुश्किल हो रहा है।

अस्थाई रूप से यूक्रेन छोड़ने की सलाह
20 फरवरी को भारतीय दूतावास ने एक एडवाइजरी जारी की। इसमें कहा गया है कि यूक्रेन में लगातार बढ़ रहे तनाव और अस्थिरता को देखते हुए जिनका यूक्रेन में रुकना जरूरी नहीं है, उन्हें और सभी भारतीय छात्रों को अस्थाई रूप से यूक्रेन छोड़ देना चाहिए। छात्रों को आपस में संपर्क बनाए रखने को कहा गया है।

पैरेंट्स बोले-राज्य सरकार मदद करे
जांजगीर में रहने वाले शिक्षक संतोष तंबोली ने बताया कि उनकी बेटी और भांजी मुस्कान तंबोली यूक्रेन के कीव में मेडिकल की पढ़ाई कर रही हैं। उनके बच्चे वापस आना चाहते हैं। लेकिन, उन्हें फ्लाइट नहीं मिल रहा है। फ्लाइट मिलने पर भी टिकट बहुत महंगी है। ऐसे में राज्य शासन को प्रदेश के बच्चों को वापस लाने के लिए प्रयास करना चाहिए। राज्य सरकार को मदद करना चाहिए

कोरोना काल में सरकार ने ली थी सुध
अकलतरा के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी राजकुमार पटेल की बेटी सुमन पटेल भी यूक्रेन के कीव में मेडिकल स्टूडेंट है। उनका कहना है कि जिस तरह से राज्य सरकार ने कोरोना काल के दौरान बाहर पढ़ने वाले स्टूडेंट को वापस लाने के लिए प्रयास किया था। वैसे ही अब प्रयास करना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार रियायत दर पर फ्लाइट की सुविधा मुहैया कराए। ताकि बच्चे सुरक्षित लौट सके।

राज्य शासन जुटाए जानकारी
पैरेंट्स का कहना है कि जिस तरह से कोरोना काल के दौरान कलेक्टर कार्यालय के जरिए बच्चों की जानकारी जुटाई गई थी। उसी तरह से सरकार को अब भी कोशिश करना चाहिए। यूक्रेन में फंसे बच्चों के पैरेंट्स परेशान हैं। लेकिन, अभी तक शासन की ओर से कोई जानकारी नहीं ली गई है और न ही हेल्प सेंटर बनाया गया है।

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