Saturday, July 20, 2024

श्री जे. किशन रेड्डी और डॉ. जितेन्द्र सिंह ने देश की वैज्ञानिक उपलब्धियां सम्बंधी “विज्ञान सर्वत्र पूज्यते” नामक सप्ताह भर चलने वाले उत्सव का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया

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संस्कृति, पर्यटन और उत्तर पूर्व क्षेत्र विकास मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने भारत और विश्व वैज्ञानिकों को, खासतौर से वर्तमान कोविड महामारी के दौर में उनके योगदानों के लिये बधाई दी है। उन्होंने कहा कि कोविड वैक्सीन के विकास में हमारे वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों ने पूरे मानव समुदाय की प्राणरक्षा की है।

श्री किशन रेड्डी आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सप्ताह भर चलने वाले “विज्ञान सर्वत्र पूज्यते” नामक विज्ञान उत्सव के उद्घाटन पर बोल रहे थे। श्री किशन रेड्डी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने उत्सव का संयुक्त उद्घाटन किया। उल्लेखनीय है कि विज्ञान सर्वत्र पूज्यते एक अखिल भारतीय कार्यक्रम है, जिसके तहत हमारी आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आजादी के अमृत महोत्सव के क्रम में देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों की उत्कृष्टता तथा उसकी भावना का उत्सव मनाया जा रहा है।

संस्कृति मंत्री ने अपने सम्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरगामी नेतृत्व के अधीन देश ने अपने 175 करोड़ नागरिकों को वैक्सीन की डोज लगाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने आगे कहा कि भारत ने 150 से अधिक देशों को वैक्सीन दी है।

 

श्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि दुनिया में भारत सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है और देश का विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के साथ गर्भ-नाल का सम्बंध रहा है।

 

उन्होंने कहा कि चार्वाक और आजीविक जैसे वैज्ञानिक संशयवादी और अनुभवजन्य तर्कवादी दार्शनिकों की प्राचीन परंपरा ने हमारी वैज्ञानिक मेधा को आगे बढ़ाया।

 

श्री रेड्डी ने कहा कि आज का भारत युवाओं का देश है। वह आत्मविश्वासी नागरिकों का देश है और भारतीय विज्ञान समुदाय के युवा सदस्यों के पास आज वैज्ञानिक मेधा का अनोखा समुच्चय है। वे जिज्ञासु बच्चों की तरह प्रश्नों के उत्तर तलाशते हैं, ताकि देख सकें कि मोड़ के दूसरी तरफ क्या है। उनके अंदर ऐसी भावना मौजूद है, जिससे वे सीमित संसाधनों को सूझ-बूझ के साथ इस्तेमाल कर सकते हैं।

 

श्री रेड्डी ने कहा कि देश आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मना रहा है। वैज्ञानिकों का योगदान अमूल्य है और भारत को इस पर गर्व है कि उसने विश्व को श्री सीवी रमन, श्री हर गोबिन्द खुराना, मेघनाद साहा, सुब्रमण्यम चंद्रशेखर, वेंकटरमण रामकृष्णन जैसे प्रतिष्ठित नोबेल प्राप्त वैज्ञानिक दिये। होमी जे. भाभा और विक्रम साराभाई के योगदानों ने भारत को और मजबूत बनाया।

 

श्री किशन रेड्डी ने कहा कि हमारी नई शिक्षा नीति, जो 34 वर्षों के बाद वजूद में आई है, उसमें विज्ञान की संस्कृति को बढ़ावा दिया गया है तथा छात्रों, युवाओं और उद्यमियों में वैज्ञानिक भावना का निरूपण किया है। विज्ञान को प्रोत्साहित करने में संस्कृति मंत्रालय की भूमिका को रेखांकित करते हुये श्री रेड़्डी ने बताया कि संस्कृति मंत्रालय 25 विज्ञान संग्रहालयों और केंद्रों की देखरेख करता है तथा उसने 25 से अधिक संग्रहालयों को राज्यों और संस्थानों को सौंपा है। वह 18 नये संग्रहालयों का विकास कर रहा है।

 

यह पहल विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से देश के विकास के अगले 25 वर्षों का खाका तैयार करने में महत्त्वपूर्ण साबित होगी।

 

श्री रेड्डी ने कहा कि देश को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हाल की सफलताओं का जश्न मनाना चाहिये, जैसे भारत ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स के अनुसार 50 नवोन्मेषी अर्थव्यवस्थाओं में 46वें स्थान पर आसीन हो गया है। नेशनल साइंस फाउंडेशन डाटाबेस के अनुसार देश वैज्ञानिक प्रकाशनों में सर्वोच्च तीन देशों में शामिल है तथा उच्च शिक्षा प्रणाली के आकार तथा डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त लोगों की संख्या के मद्देनजर देश तीसरे स्थान पर है।

 

देश पूरी दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप संकुल बन रहा है। इधर हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तो दूसरी तरफ इसी बीच 75 यूनीकॉर्न और 50 हजार से अधिक स्टार्ट-अप अस्तित्व में आ चुके हैं। इनमें से 10 हजार स्टार्ट-अप तो पहले छह महीने में ही स्थापित हो गये हैं।

 

श्री रेड्डी ने कहा कि कार्यक्रम हमारे युवा वैज्ञानिकों को नई दिशा देगा, जिससे उन्हें नई प्रेरणा और नया उत्साह मिलेगा।

 

कार्यक्रम में भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. के. विजय राघवन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. एस. चंद्रशेखर, प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय की वैज्ञानिक सचिव श्रीमती (डॉ.) परविन्दर मैनी, विज्ञान प्रसार के निदेशक डॉ. नकुल पाराशर तथा वैज्ञानिक समुदाय के सदस्यों ने हिस्सा लिया।

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