Monday, July 22, 2024

समाज से लड़कर एक बेटी बनी DSP:ललिता के गांव में बेटियों को पढ़ाना अच्छा नहीं माना जाता था, उसने जिद की और हासिल किया मुकाम

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हर कामयाब इंसान के पीछे किसी न किसी तरह की एक संघर्ष की कहानी छिपी होती है। इन्हीं में से एक DSP ललिता मेहर की भी कहानी है, जो लोगों के लिए प्रेरणा भी है। पैसों की तंगी से लेकर समाज की कुरीतियां और पढ़ाई के बीच विवाह के लिए रिश्ता घर तक पहुंचा। किसान पिता की मेहनत और मां के साथ खड़े रहने से पुलिस अफसर बनने तक का सफर इन्होंने तय किया है। छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव से निकल कर DSP बन वर्तमान में जगदलपुर में अपनी सेवाएं दे रहीं ललिता मेहर ने खास बातचीत की

ललिता ने बताया कि वो छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के एक छोटे से गांव गुडू की रहने वाली हैं। पिता किसान हैं। 5 भाई-बहनों में वे सबसे छोटी हैं। पिता खेती किसानी के काम के साथ बाजार-बाजार घूम कर कपड़ा बेचने का काम भी करते हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। जिस गांव में रहते हैं वहां समाज में बेटियों को लेकर आज भी कई कुरीतियां हैं। ललिता ने कहा कि, उनकी दो बड़ी बहनें पढ़ना चाहती थीं, लेकिन उस समय लड़कियों को ज्यादा पढ़ने नहीं दिया जाता था। एक बहन ने 9वीं तो दूसरी ने 12वीं तक की ही बड़ी मुश्किल से पढ़ाई की है। इसके बाद उनकी शादी करवा दी गई।

घर की आर्थिक तंगी के बीच ललिता की पढ़ाई भी मुश्किल हो रही थी। 5वीं तक गांव के ही स्कूल में और फिर 6वीं से12वीं तक जैसे-तैसे पुसौर की एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई की। इस बीच लोग पिता से कहने लग गए थे कि बेटी है, पढ़ लिख कर क्या करेगी? शादी का समय आ गया है। हाथ पीले करवा दो। फिर भी पिता ने सामाजिक कुरीतियों के बीच सब की खरी-खोटी सुन जैसे-तैसे पढ़ाई करवाई। 12वीं की पढ़ाई के बाद ललिता ने आगे कॉलेज की पढ़ाई करने के लिए रायगढ़ गई। आर्थिक तंगी के बीच जैसे-तैसे उन्होंने फर्स्ट ईयर पास किया। जब सेकंड ईयर की पढ़ाई करनी शुरू की तो विवाह के लिए रिश्ता आ गया था।

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