नई दिल्ली. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 6 जून को मौद्रिक नीति की घोषणा की, जिसमें कई बड़े फैसले लिए गए जो आम जनता और बैंकिंग सेक्टर दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. आरबीआई ने कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) यानी नकद आरक्षित अनुपात में 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती करने का ऐलान किया है. इसका सीधा मतलब है कि अब बैंकों को अपनी जमा राशि का कम हिस्सा आरबीआई के पास रखना होगा, जिससे उनके पास अधिक पैसा उपलब्ध रहेगा और वे अधिक लोन बांटने में सक्षम होंगे. यह कटौती एक साथ नहीं बल्कि चार हिस्सों में की जाएगी.
आरबीआई ने बताया कि चार बार में 25-25 बेसिस प्वाइंट की कटौती होगी, न कि एक ही बार में. पहली कटौती 6 सितंबर को, दूसरी 4 अक्टूबर, तीसरी 1 नवंबर और चौथी 29 नवंबर को लागू होगी. इससे बैंकिंग सिस्टम में लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये की नकदी आएगी.
लगातार हो रही कैश बढ़ाने की कोशिश, भरा पड़ा खजाना
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि जनवरी 2025 से अब तक आरबीआई ने लगभग 9.5 लाख करोड़ रुपये की स्थायी नकदी सिस्टम में डाली है, जिससे बाजार में लिक्विडिटी बनी हुई है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत के पास विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) इतने मजबूत हैं कि यह 11 महीनों तक के सामान आयात को कवर कर सकता है और देश की 96 फीसदी बाहरी देनदारी को भी संभालने की क्षमता रखता है.


