हिंदी मासानुसार कार्तिक मास का आरंभ 8 अक्टूबर 2025 बुधवार से हो गया है। जो 5 नवंबर 2025 बुधवार तक रहेगा। आयुर्वेद अनुसार प्रत्येक माह में विशेष तरह के खान-पान का वर्णन किया गया है जिसे अपनाकर हम स्वस्थ रह सकते हैं। इसी विषय पर छत्तीसगढ़ प्रांत के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक नाड़ी वैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया की भारतीय परंपरा में ऋतुचर्या यानी ऋतुनुसार आहार-विहार करने की परंपरा रही है। यह संस्कार हमें विरासत में मिला है। अभी कार्तिक मास का आरंभ 8 अक्टूबर 2025 बुधवार से हो गया है। जो 5 नवंबर 2025 बुधवार रहेगा। इस अंतराल में हमें अपने आहार-विहार पर विशेष ध्यान देना चाहिये। कार्तिक मास में बादल छट जाने से आसमान साफ एवं सूर्य चमकदार हो जाता है। जिसके कारण आयुर्वेदानुसार पित्त दोष का प्रकोप होता है। जिससे पित्त जनित रोग, त्वचा संबंधी रोग, ज्वर, पित्तज कास रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में हमे पित्त शामक खाद्य पदार्थों स्निग्ध, मधुर तथा तिक्त रस वाले, हल्के, पौष्टिक और लंबे समय तक ऊर्जा बनाये रखने वाले गुणों से युक्त आहार का सेवन करना चाहिये। पित्त वर्धक खाद्य पदार्थों एवं कड़वे, कसैले रस युक्त आहार से परहेज करना चाहिये। इस माह में मट्ठा (छाछ) का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिये इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। इस माह में दाल का सेवन भी नहीं करना चाहिये। कार्तिक मास में मूली एवं आंवले का सेवन हितकारी होगा। कार्तिक मास में जिमीकंद का सेवन अवश्य करना चाहिये। इस विषय मे एक लोकोक्ति है जो दीपावली त्योहार से जुड़ी है। कार्तिक मास में ही दीपावली का त्योहार भी मनाया जाता है ।जिसमें कहावत हैं की दीपावली में जिमीकंद का सेवन न करने वाला अगले जन्म में छुछूंदर होता है। कार्तिक मास में रसायन के रूप मे च्यवनप्राश का तथा हरीतकी का सममात्रा में शर्करा के साथ सेवन करना चाहिये।
जीवनशैली- इस माह में धूप,ओस, और पूर्वी हवाओं से, दिन में शयन करने से, भूख लगे बिना भोजन करने से एवं अधिक व्यायाम से बचाव करना चाहिये।
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