आयुर्वेद की अद्वितीय क्षमता का एक और उदाहरण सामने आया है, जब रीमाडीह जैजैपुर निवासी प्रहलाद चंद्रा को गंभीर त्वचा रोग सोरायसिस से मुक्ति मिली। प्रहलाद चंद्रा ने बताया कि वे लगभग 5 साल से गम्भीर त्वचा रोग सोरायसिस से ग्रसित थे। उन्हें कई जगह इलाज कराने के बाद भी आराम नहीं मिल पाया रहा था। ऐसे में उनके मित्र सुरेंद्र यादव ने उन्हें आयुर्वेद चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा से मिलकर आयुर्वेद ट्रीटमेंट कराने की सलाह दी। तब प्रहलाद चंद्रा जो की पूरी तरह से हताश हो चुके थे उन्होंने मित्र की सलाह पर आयुर्वेद की शरण में जाने का मन बनाकर नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा के पास जाकर अपना ट्रीटमेंट करवाया और आयुर्वेद का चमत्कार कहिये की उन्हें 15 दिन की चिकित्सा से ही 75 प्रतिशत आराम हो गया और वो पूरी तरह से रोगमुक्त होने के प्रति आश्वस्त भी नजर आये जो उनके चेहरे से झलक रहा था। उन्होंने कहा की मात्र 15 दिन की दवा से जो मुझे आराम मिला वास्तव मे वो मेरे लिये किसी चमत्कार से कम नहीं है। मैं कई सालों से परेशान था बहुत से डाक्टरों को दिखाया पर जो कोई नहीं कर पाया वो नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने कर दिया। उनका हृदय से धन्यवाद करता हूं। मैंने तो आशा ही छोड़ दी थी की कभी इस रोग से छुटकारा मिल सकेगा अब पूरा विश्वास हो गया है की मैं भी अब रोगमुक्त होकर स्वस्थ जीवन जी सकूंगा। चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया की आजकल की जीवनशैली और प्रदूषण के कारण त्वचा संबंधी रोग बढ़ते जा रहे हैं। इन रोगों में सबसे आम है त्वचा संबंधी रोग ‘’सोरायसिस’’ जो आजकल बहुत देखने को मिल रहा है। शरीर पर लाल चकत्ते और उन पर सफेद रंग की ऊपरी त्वचा, त्वचा में दरारें पड़ना, पपड़ी जैसा निकलना, पानी जैसा पतला द्रव बहना, खुजली, डैंड्रफ और जलन ये उसके सामान्य लक्षण हैं। आयुर्वेद में सोरायसिस को एक कुष्ठ, मंडल कुष्ठ या किटिभ कुष्ठ जैसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है। बोलचाल की भाषा में कुछ लोग इसे छाल रोग भी कहते हैं। इस रोग में औषधियों के साथ खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिये विशेषतः जंक फूड से परहेज रखना चाहिए। साथ ही विरुद्ध आहार (जैसे दूध के साथ नमकीन खाद्य पदार्थ ) पर विशेष ध्यान देकर इनके प्रयोग से बचना चाहिये। मानसिक तनाव भी सोरायसिस का एक प्रमुख कारण है। जिसके लिये रोगी को प्राणायाम एवं योगाभ्यास नियमित करना चाहिये। इन छोटे छोटे उपायों को अपनाकर निश्चित ही इस असाध्य समझे जाने वाले सोरायसिस जैसे कठिन एवं जिद्दी चर्म रोग से छुटकारा पाया जा सकता है। जैसा लाभ प्रहलाद चंद्रा जी को हुआ। यह चमत्कार मेरा नहीं आयुर्वेद का है। आयुर्वेद जो संपूर्ण जगत के प्राणीयों के लिये हैं, जो ऋषियों एवं आचार्यो की देन है, जो शाश्वत है, नित्य है, विशुध्द और निरापद है। हम उस विधा के अनुयायी हैं, शिष्य हैं, चिकित्सक हैं। और इस पर हमें घमंड नहीं अपितु गर्व है की हम उस ऋषि परंपरा के संवाहक हैं। नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया की आमजन में आयुर्वेद चिकित्सा के प्रति यह भ्रांति है की आयुर्वेद में देर से फायदा होता है जबकी ऐसा बिल्कुल नहीं है। आयुर्वेद में यदि रोग निदान, औषधि चयन सटीक हो और रोगी पथ्य अपथ्य का पालन कर नियम पूर्वक औषधियों का उचित अनुपान के साथ सेवन करे तो आयुर्वेद चिकित्सा न केवल तत्काल कारगर होती है अपितु रोग को जड़ से खत्म करती है। अतः हम सभीको स्वास्थ्य की दृष्टि से अपनी चिकित्सा के लिये पहली प्राथमिकता आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को देनी चाहिये।
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