महानदी काम्प्लेक्स के आगे दादागिरी से लगते हैं ठेले, बोलते हैं किसमें हैं दम जो हटा सके हमको।
ठेले वाले कचरा फैलाकर स्वच्छता अभियान का उड़ा रहे मखौल। झाड़ू निकालकर दुकान के सामने इकट्ठा कर न केवल कचरा रखते है, साथ में झाड़ू भी वहीँ छोड़ते है…
न उनके पास कचरे का डिब्बा, न शहर के स्वच्छता रैंक से उन्हें मतलब*
बोलने से कुछ फर्क़ नहीं पड़ता न नगर निगम द्वारा कार्यवाहि होती नहीं हैं…
न ठेले वालों को कार्यवाहि का डर ही है…
वो तो उल्टा कहते हैं कि हमने नगर निगम से परमिशन है हमारा कोई कुछ नहीं कर सकता…


