CG NEWS : धान खरीदी में बड़ा बदलाव’ 30 जिलों में गिरावट, कम उत्पादन वाले इलाकों में बढ़ी आवक

रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान धान खरीदी को लेकर चौंकाने वाले सरकारी आंकड़े सामने आए हैं। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल द्वारा सदन में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 33 में से 30 जिलों में इस साल धान की खरीदी में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, कम उत्पादन वाले कुछ सीमावर्ती जिलों में पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड टूट गया है, जिससे धान की अवैध तस्करी और ‘कोचिया’ राज की आशंका गहरा गई है।

आंकड़ों का खेल

  • जिलों की स्थिति: रायपुर, महासमुंद और जांजगीर-चांपा जैसे सर्वाधिक धान उत्पादन वाले जिलों के किसान इस बार धान बेचने में पीछे रह गए हैं।

  • बस्तर और बलरामपुर में उछाल: हैरानी की बात यह है कि जिन जिलों में उत्पादन कम है, वहां खरीदी का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।

  • तस्करी का साया: बलरामपुर जैसे सीमावर्ती जिले में धान तस्करी के कई मामले पकड़े जाने के बावजूद वहां रिकॉर्ड खरीदी दर्ज की गई है।

बलरामपुर और बस्तर के रोचक आंकड़े

जानकारी के अनुसार, इन दो जिलों में पिछले तीन सालों से खरीदी का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है:

जिला वर्ष 2023-24 (मीट्रिक टन) वर्ष 2024-25 (मीट्रिक टन) इस साल (2025-26)
बलरामपुर 2,58,598 2,97,036 3,02,523
बस्तर 2,45,227 2,76,082 2,81,743

सदन में विपक्ष के सवाल: “कहां से आया इतना धान?”

खाद्य मंत्री के इन आंकड़ों के बाद सदन में गरमागरम बहस देखने को मिली। विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब मुख्य उत्पादक जिलों में खरीदी कम हुई है, तो सीमावर्ती जिलों में उत्पादन से अधिक धान कैसे पहुंच रहा है? आशंका जताई जा रही है कि दूसरे राज्यों से कम कीमत पर धान लाकर छत्तीसगढ़ की मंडियों में खपाया गया है।

मंत्री का जवाब और जांच का आश्वासन

खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने बताया कि सरकार हर जिले की खरीदी की निगरानी कर रही है। बलरामपुर और अन्य जिलों में हुई अधिक खरीदी की बारीकी से जांच की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह वास्तविक किसानों का धान है या बिचौलियों की साठगांठ का परिणाम।

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