निजी स्कूलों की मनमानी पर भी High Court की नजर, अभिभावकों को राहत की उम्मीद

बिलासपुर, 27 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत आरक्षित सीटों में कथित कमी और निजी स्कूलों की अनियमितताओं को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए हलफनामे में कई विरोधाभास पाए और स्कूल शिक्षा विभाग को सभी बिंदुओं पर विस्तृत एवं स्पष्ट जवाब देने के निर्देश दिए।

दरअसल, पिछली सुनवाई में कोर्ट ने यह जानना चाहा था कि जब पहले आरटीई के तहत लगभग 85 हजार सीटें थीं, तो उनमें करीब 30 हजार की कमी कैसे आ गई। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया था। हालांकि, इस बार सचिव की अनुपस्थिति में संयुक्त सचिव द्वारा 21 मार्च को हलफनामा पेश किया गया, जिसे कोर्ट ने रिकॉर्ड पर तो लिया, लेकिन उसमें दी गई जानकारी पर असंतोष जताया।

सीटों के आंकड़ों पर उठे सवाल
सरकार की ओर से बताया गया कि सत्र 2026-27 में प्री-प्राइमरी स्तर पर आरटीई के तहत प्रवेश नहीं दिया जाएगा, क्योंकि यह कानून केवल 6 से 14 वर्ष के बच्चों पर लागू होता है। सरकार के अनुसार, पिछले सत्र के 35,335 छात्र कक्षा 1 में जाएंगे और नए 19,540 छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। इस प्रकार कुल 54,875 छात्रों को आरटीई के तहत लाभ मिलेगा। सरकार ने इसी आधार पर सीटों में कमी के आरोप को गलत बताया है।

हालांकि, कोर्ट ने दुर्ग जिले से जुड़ी शिकायतों के निपटारे को लेकर भी विरोधाभास पाया। जहां हलफनामे में 118 में से 77 शिकायतों के समाधान का दावा किया गया, वहीं प्रस्तुत दस्तावेजों में केवल 7 मामलों के निराकरण की पुष्टि हुई। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए राज्य के दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।

निजी स्कूलों की अनियमितताओं पर भी चिंता
सुनवाई के दौरान निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठे। कुछ स्कूलों पर फर्जी सीबीएसई संबद्धता का दावा करने, अभिभावकों को गुमराह करने, सालभर होम एग्जाम लेने के बाद अचानक बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए मजबूर करने और मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने के आरोप लगे।
इसके अलावा, शिकायत करने वाले अभिभावकों को स्कूल प्रबंधन द्वारा डराने-धमकाने और झूठे मामलों में फंसाने की बात भी सामने आई, जिसे कोर्ट ने गंभीर चिंता का विषय माना।

8 अप्रैल को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को निर्देश दिया है कि वे सभी मुद्दों पर विस्तृत हलफनामा अगली सुनवाई से पहले प्रस्तुत करें। साथ ही, जिन मामलों में अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है, उन्हें भी जल्द पेश करने को कहा गया है।

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