रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। रायपुर स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) के स्पेशल कोर्ट में आबकारी विभाग के अधिकारियों समेत कुल 59 लोगों की पेशी हुई। सुबह से ही कोर्ट परिसर में हलचल और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी नजर आई।
EOW-ED की ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी
इससे पहले आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बीते तीन दिनों में कार्रवाई करते हुए दो शराब निर्माण कंपनियों के ट्रकों को जब्त किया था। वहीं कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में कार्यरत अकाउंटेंट समेत चार लोगों को पूछताछ के लिए तलब किया जा चुका है।
जांच एजेंसियां इस पूरे मामले में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की भी तलाश कर रही हैं, जो पिछले कई वर्षों से फरार बताए जा रहे हैं। उनकी भूमिका को लेकर ED और EOW गंभीरता से जांच कर रही हैं।
3200 करोड़ से ज्यादा के घोटाले का आरोप
इस मामले में ED द्वारा दर्ज FIR में करीब 3200 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का जिक्र किया गया है। इसमें राजनेता, आबकारी अधिकारी और कारोबारी समेत कई लोगों को नामजद किया गया है।
जांच में सामने आया है कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में एक सिंडिकेट बनाकर इस घोटाले को अंजाम दिया गया। इसमें IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर की भूमिका प्रमुख बताई जा रही है।
तीन तरीके से किया गया घोटाला (A, B, C मॉडल)
A: डिस्टलरी से कमीशन वसूली
डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 से 100 रुपए तक कमीशन लिया गया। कीमत बढ़ाकर और ओवर बिलिंग की छूट देकर इस कमीशन की भरपाई कराई गई।
B: नकली होलोग्राम से शराब बिक्री
नकली होलोग्राम लगाकर अवैध शराब को सरकारी दुकानों के जरिए बेचा गया। जांच में सामने आया है कि करीब 40 लाख पेटी शराब इस तरीके से खपाई गई, जिससे सिंडिकेट को भारी मुनाफा हुआ।
C: सप्लाई जोन में हेरफेर कर उगाही
डिस्टलरी के सप्लाई एरिया को बदलकर अवैध वसूली की गई। जांच में तीन साल में करीब 52 करोड़ रुपए की उगाही के साक्ष्य मिले हैं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस मामले में अभी और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। लगातार हो रही पेशियों और पूछताछ से कई अहम कड़ियां सामने आने की उम्मीद है।


