पत्नी के नाम पर बनाई थीं फर्में, बेनामी निवेश का खुला राज
EOW की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि समीर विश्नोई ने अपनी पत्नी प्रीति विश्नोई के नाम पर 3 से 4 शेल फर्में बनाई थीं। इन फर्मों का इस्तेमाल अवैध तरीके से कमाई गई काली कमाई को सफेद करने और अचल संपत्तियों में निवेश करने के लिए किया जा रहा था। इन डमी कंपनियों के ज़रिए रायपुर और आसपास के इलाकों में कई कीमती जमीनें खरीदी गई थीं। आप उस रणनीतिक साज़िश को महसूस कर सकते हैं; फाइल दर फाइल परतें खुल रही हैं कि कैसे एक सीनियर अफसर ने सिस्टम को चकमा देकर करोड़ों का साम्राज्य खड़ा किया।
कोयला घोटाले की काली कमाई पर एक्शन
यह पूरी कार्रवाई 2019 से 2021 के बीच हुए उस कोयला लेवी घोटाले से जुड़ी है, जिसमें प्रति टन 25 रुपये की अवैध वसूली की जाती थी। समीर विश्नोई, जो उस समय खनिज विभाग के संचालक थे, पर आरोप है कि उन्होंने ही मैनुअल एनओसी (NOC) की प्रक्रिया शुरू की थी ताकि वसूली का खेल आसानी से चल सके। ₹540 करोड़ के इस महाघोटाले में विश्नोई पहले भी जेल जा चुके हैं। आज की कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि जांच एजेंसियां केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भ्रष्टाचार की जड़ों—यानी बेनामी संपत्तियों—पर प्रहार कर रही हैं।
“प्रशासन बहुत स्पष्ट है। हम किसी भी दोषी को छोड़ने वाले नहीं हैं। ACB और EOW को पूरी छूट दी गई है कि वे भ्रष्टाचार से अर्जित पाई-पाई को वापस लाएं। यह केवल एक अधिकारी की बात नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सफाई का मामला है।”
इस जब्ती के बाद समीर विश्नोई की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। बेनामी संपत्ति कानून के तहत अब इन संपत्तियों के वास्तविक मालिकों को नोटिस जारी किए जाएंगे। माना जा रहा है कि आने वाले हफ्तों में कई अन्य निलंबित अधिकारियों और नेताओं की संपत्तियों पर भी इसी तरह का “बुलडोजर” चल सकता है। क्या यह कार्रवाई केवल प्रशासनिक है या इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति है? यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि छत्तीसगढ़ में अब रसूखदारों की नींद उड़ चुकी है।


