कोरबा 01 मई 2026/
सुशासन तिहार ने ग्राम धनरास की गृहिणी माधुरी के जीवन में नई रोशनी भर दी है। वर्षों से लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने की मजबूरी झेलती आ रही माधुरी आज बेहद खुश है, क्योंकि शिविर में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत उन्हें निःशुल्क गैस कनेक्शन, सिलेंडर और चूल्हा प्रदान किया गया है।
गर्मी, धुआँ और हर दिन लकड़ी जुटाने की चिंता माधुरी के लिए हमेशा से एक बड़ी परेशानी रही। दो छोटे बच्चों और मजदूरी करने वाले पति की देखभाल के बीच लकड़ी से चूल्हा जलाना उनके लिए थका देने वाला काम बन गया था। गैस कनेक्शन के लिए उन्होंने कई बार पैसे जोड़े, लेकिन पूरी राशि एक साथ जमा न कर पाने के कारण वह गैस कनेक्शन नहीं ले पाईं।
माधुरी ने बताया कि उनके गाँव धनरास मे सुशासन तिहार के तहत शिविर लगने वाली है। शिविर में ग्रामीण अपना आवेदन देकर शासन की योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। उन्हें यह भी जानकारी मिली कि शिविर में आवेदन देकर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। इस जानकारी के बाद माधुरी ने तुरंत आवेदन दिया। आवेदन की जांच के उपरांत खाद्य विभाग द्वारा उनका चयन किया गया और उन्हें शिविर में गैस कनेक्शन प्रदान करने के लिए बुलाया गया।
शिविर में उद्योग, वाणिज्य और श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने स्वयं माधुरी को गैस कनेक्शन, सिलेंडर और चूल्हा प्रदान किया। गैस चूल्हा मिलने के बाद माधुरी ने बताया कि लकड़ी का चूल्हा जलाना उनके लिए बेहद कठिन था और अब गैस मिलने से खाना बनाना बहुत आसान हो गया है। उन्होंने कहा कि दो छोटे बच्चों और मजदूरी करने वाले पति के लिए कभी भी तुरंत चूल्हा जलाकर भोजन बनाना मुश्किल था, लेकिन अब केवल लाइटर ऑन करने भर से खाना-नाश्ता आसानी से तैयार हो जाएगा।
माधुरी को यह गैस कनेक्शन पूरी तरह निःशुल्क प्रदान किया गया है। साथ ही 100 दिन का रोजगार पूरा करने पर उन्हें जॉब कार्ड भी दिया गया है, जिससे उनकी आर्थिक सुरक्षा और मजबूत हुई है।
शिविर में कलिता बाई पति भरत लाल, ग्राम धनरास और नंदिनी वैष्णव पति अशोक कुमार, ग्राम धनरास को भी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन और चूल्हा प्रदान किया गया। दोनों महिलाओं ने गैस मिलने पर राहत व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजना से उन्हें असल लाभ प्राप्त हुआ है और सुशासन तिहार जैसे कार्यक्रम ग्रामीण हितग्राहियों के लिए अत्यंत लाभदायक साबित हो रहे हैं।
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