कोरबा 16 जुलाई 2026/छत्तीसगढ़ की पहचान केवल अपने प्राकृतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि खेतों में पसीना बहाने वाले अन्नदाताओं से भी है। बरसात के मौसम में जब गाँवों के खेत ट्रैक्टरों की गूंज से जीवंत हो उठते हैं और किसान नई फसल की तैयारी में जुट जाते हैं, तब ग्रामीण जीवन की वास्तविक तस्वीर सामने आती है। खेतों में जोताई करते किसानों के चेहरों पर दिखने वाली मुस्कान केवल अच्छी पैदावार की उम्मीद नहीं, बल्कि मजबूत कृषि व्यवस्था, समय पर उपलब्ध कृषि आदानों और अपनी उपज के सर्वाधिक समर्थन मूल्य मिलने के विश्वास का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को कृषि से जुड़ी आवश्यक सुविधाएँ सरल, सुलभ और समयबद्ध रूप से उपलब्ध हो रही हैं, जिससे खेती के प्रति उनका विश्वास और छत्तीसगढ़ की ग्रामीण समृद्धि निरंतर मजबूत हो रही है।
कोरबा जिले के ग्राम सकदुकला निवासी किसान श्री कँवल सिंह अपने तीन एकड़ कृषि भूमि में धान की खेती करते हैं। इन दिनों वे अपने भतीजे के साथ खेतों में धान की रोपाई के कार्य में पूरी लगन और उत्साह के साथ जुटे हुए हैं। खेत में चल रहे रोपाई कार्य के बीच उनके चेहरे पर आत्मविश्वास और अच्छी फसल की उम्मीद साफ दिखाई देती है। उनका कहना है कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि उनके परिवार की पहचान और भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है।
श्री सिंह बताते हैं कि इस वर्ष मानसून समय पर आने से खेतों की जोताई और रोपाई का कार्य भी समय पर शुरू हो गया। इससे खेती का पूरा चक्र व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ रहा है। वे मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं और इस बार भी बेहतर उत्पादन की उम्मीद के साथ रोपाई का कार्य पूरा कर रहे हैं। परिवार के सदस्य भी खेती के कार्य में उनका पूरा सहयोग कर रहे हैं, जिससे कृषि कार्य समय पर संपन्न हो रहा है।
वे बताते हैं कि खेती के लिए आवश्यक कृषि आदान सामग्री समय पर उपलब्ध होने से इस बार किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने भैंसमा सहकारी समिति से डीएपी, यूरिया, सुपर फॉस्फेट सहित आवश्यक उर्वरक और अन्य कृषि सामग्री आसानी से प्राप्त की। समय पर खाद एवं उर्वरकों की उपलब्धता से खेती की तैयारियाँ बिना किसी रुकावट के पूरी हुईं और फसल की बढ़वार के लिए भी आवश्यक संसाधन सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात समय पर कृषि संसाधनों की उपलब्धता और उपज का उचित मूल्य है। उनका मानना है कि धान का समर्थन मूल्य, अंतर की राशि का एकमुश्त भुगतान तथा सहकारी समितियों के माध्यम से खाद-बीज की सहज उपलब्धता जैसी व्यवस्थाओं ने किसानों का विश्वास मजबूत किया है। इन सुविधाओं के कारण खेती पहले की अपेक्षा अधिक व्यवस्थित, सरल और लाभकारी बनी है। वे पूरे विश्वास के साथ कहते हैं कि यदि इसी प्रकार किसानों को समय पर आवश्यक सुविधाएँ मिलती रहें, तो खेती न केवल अधिक समृद्ध होगी बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी और अधिक सशक्त बनेगी।
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