RTE Fee Reimbursement : रायपुर। छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। राज्य सरकार ने शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों को दी जाने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि बढ़ाने की मांग को फिलहाल पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है। सरकार के इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ही निजी स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान किया जाएगा।
यह निर्णय उन निजी स्कूल संचालकों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जो लंबे समय से प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि की मांग कर रहे थे। सरकार का कहना है कि मौजूदा नियमों और वित्तीय प्रावधानों के आधार पर प्रतिपूर्ति की व्यवस्था जारी रहेगी।
क्या है RTE शुल्क प्रतिपूर्ति व्यवस्था?
RTE (Right to Education) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश देना अनिवार्य होता है। इन विद्यार्थियों की पढ़ाई का खर्च राज्य सरकार निर्धारित नियमों के अनुसार शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में निजी स्कूलों को देती है।
निजी स्कूलों का तर्क है कि वर्तमान प्रतिपूर्ति राशि बढ़ती संचालन लागत, शिक्षकों के वेतन, बिजली, भवन रखरखाव और अन्य खर्चों की तुलना में पर्याप्त नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग की थी।
सरकार ने क्यों खारिज की मांग?
राज्य सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि शुल्क प्रतिपूर्ति बढ़ाने के लिए कोई ठोस आधार या ऐसा प्रावधान उपलब्ध नहीं है, जिसके आधार पर वर्तमान दरों में संशोधन किया जाए। इसलिए निजी स्कूलों की मांग को स्वीकार नहीं किया गया।
सरकार ने संकेत दिया कि RTE के तहत भुगतान पूर्व निर्धारित नियमों और वित्तीय मानकों के अनुसार ही किया जाएगा। फिलहाल प्रतिपूर्ति राशि में किसी प्रकार की वृद्धि का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
निजी स्कूलों पर क्या होगा असर?
सरकार के इस फैसले से निजी स्कूल संचालकों में नाराजगी देखने को मिल सकती है। उनका कहना है कि महंगाई और शिक्षा संचालन की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि प्रतिपूर्ति राशि कई वर्षों से लगभग समान बनी हुई है। ऐसे में स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि सरकार का मानना है कि RTE के तहत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना प्राथमिकता है और वर्तमान नियमों के अनुसार ही भुगतान की प्रक्रिया जारी रहेगी।
सरकार के इस फैसले का सीधा असर RTE के तहत पढ़ने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों पर नहीं पड़ेगा। RTE के तहत पात्र बच्चों को पहले की तरह नि:शुल्क शिक्षा का लाभ मिलता रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना का संचालन पूर्ववत जारी रहेगा और पात्र विद्यार्थियों के अधिकारों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।



