जांजगीर-चांपा । शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर नगर के परशुराम मार्ग , आशीष नगर निवासी श्रीमति रेखा – रमाकांत कैवर्त द्वारा कलश स्थापना कर अपने घर के देवी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित समलेश्वरी देवी मूर्ति के समक्ष ज्वारा ( जौं ) बोकर पूजा-अनुष्ठान किया जा रहा हैं । यह दिव्य परंपरा उनके द्वारा पिछले 15 वर्षों से लगातार दोनों नवरात्रि चैत्र और क्वांर में निभाई जा रही हैं ।
आखिर क्या हैं जवारा का महत्व
धार्मिक आस्था रखने वाले शशिभूषण सोनी ने बताया कि नवरात्रि पर्व में ज्वारा उगाना देवी दुर्गा पूजा का मुख्य हिस्सा माना जाता हैं । कलश स्थापना के दिन मिट्टी के पात्र में गेहूं या जौं के बीज बोए जाते हैं और नौं दिनों तक रोज पानी देकर हरे अंकुर उगाए जाते हैं । पौराणिक मान्यता हैं कि जौं उर्वरता , समृद्धि और नए जीवन का प्रतीक हैं और पौराणिक कथा के अनुसार देवी द्वारा दैत्यों के संहार के बाद धरती पर पहली फसल के रूप में जौं उगा था, इसलिए इसे मां की कृपा का संकेत माना जाता हैं ।श्रीमति रेखा कैवर्त ने कहा कि देवी मां की कृपा ही हैं कि इसी बहाने माता रानी की सेवा करने का अवसर मिल रहा हैं । जवारे को प्रकृति और अन्नपूर्णा स्वरूप से जोड़ा जाता हैं, हम लोग सबसे पहले बिना लहसून और प्याज के भोजन बनने के बाद सबसे पहले मां को भोज्य पदार्थ अर्पित कर हम-सब ग्रहण करते हैं । छत्तीसगढ़, उड़ीसा, मध्यप्रदेश और अन्य क्षेत्रों में इसे जंवारा कहा जाता हैं और जसगीत के साथ इसकी देखभाल की जाती हैं । उन्होंने यह भी कहा कि ज्वारे जितने हरे-भरे और घने होते हैं, उसे घर में खुशहाली और मां का आशीर्वाद माना जाता हैं । नवमी या दशमी पर ज्वारे को विधि-विधान से राम बांधा तालाब के जलस्रोत में विसर्जित करके पूजा पूर्ण करते हैं ।
कैवर्त परिवार की अद्भुत आस्था
श्रीमति रेखा कैवर्त धार्मिक आस्था से परिपूर्ण दिन भर माता रानी की सेवा में लगी रहती हैं । प्रिंट मीडिया के शशिभूषण सोनी से चर्चा करने बड़ी मुश्किल से तैयार हुई । उन्होंने कहा कि मेरे घर में एक छोटा-सा मंदिर हैं जहां मेरे पति रमाकांत और दोनों बच्चियां पूजा करते हैं। समलेश्वरी मैय्या में हमारी अटूट आस्था हैं और हम सब हनुमानजी के भी उपासक हैं ।
24 घंटे ज्योति कलश में दीप प्रज्ज्वलित
हमारे घर में नवरात्रि पर्व पर 09 स्थापित ज्योति कलश पर 24 घंटे दीपक की ज्योति प्रज्ज्वलित होती हैं और इसका तेज़ मुझे गहरे तक प्रभावित करती हैं ।
मां की शक्ति का अद्भुत चमत्कार, एक छोटी-सी बच्चीं के रुप में छम-छम करती आई और स्थापित देवी में समा गई- रमाकांत कैवर्त
पेशे से टेलरिंग कार्य करने वाले मां के साधक रमाकांत कैवर्त ने बताया कि आद्य शक्ति मां सम्लेश्वरी की उपासना शारदीय और चैत्र नवरात्र में मैं बचपन से ही करता आ रहा हूं। नवरात्रि में नौं दिनों की साधना पूरे 365 दिन का फल देने वाली मां दुर्गा ही हैं । एकाग्रचित्त और मन वचन और कर्म से की गई शक्ति की उपासना से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं । उन्होंने बताया कि दो दिन पहले ही मेरे घर में एक छोटी-सी बच्चीं छम-छम करती हुई आई और सीधे स्थापित मां सम्लेश्वरी की मूर्ति में जाकर समाहित हो गई। मैं देवी मैया के ही वस्त्र ज्यादा तैयार करता हूं और इस कार्य में मुझे सुकून मिलता हैं । छोटे से कार्य करने मात्र से मेरे परिवार का जीवकोपार्जन आराम से गुजर रहा हैं । उन्होंने यह भी कहा कि शारदीय नवरात्र पर्व पर आशीष नगर सोनी कालोनी में स्थापित नव दुर्गा की मूर्तियों के वस्त्र मैंने ही सिले हैं । मैं विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों की मूर्तियों के वस्त्र धारण करवाता हूं । शारदीय नवरात्र अनुष्ठान सुख, समृद्धि , अच्छी फसल और जीवन के नए शुभ आरंभ का प्रतीक पर्व हैं , जिसे माता दुर्गा का आशीर्वाद माना जाता हैं ।
मां सम्लेश्वरी मैय्या की कृपा सभी श्रद्धालु भक्तों पर बनी रहे – डॉ जतिंदर पाल सिंह
इस अवसर पर दर्शन-पूजन करने छ: भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य श्रीमति संगीता पाण्डेय, पूर्व पार्षद तथा चांपा महिला रत्न से विभूषित श्रीमति शशिप्रभा सोनी, प्रोफेसर सुश्री निम्मी पाण्डेय, शशिभूषण सोनी, श्रीमति श्वेता, सत्यप्रभा स्वर्णकार, इंजीनियर आलोक सोनी, राहुल अहीर सहित अन्य लोगों ने ज्वारा दर्शन कर सौभाग्य प्राप्त किया। यह क्षण अत्यंत श्रद्धा और आस्था से भरा रहा । मां सम्लेश्वरी की कृपा सभी श्रद्धालु भक्तों पर बनी रहे और सबके जीवन में सुख , शांति एवं समृद्धि आये ।




