CG BREAKING : रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती परीक्षा से जुड़े बहुचर्चित कथित घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर को बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने दोनों आरोपियों को नियमित जमानत दे दी है। यह आदेश जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने सुनाया। दोनों लंबे समय से न्यायिक हिरासत में थे।
एक साल से ज्यादा समय से जेल में थीं आरती वासनिक
मामले में आरती वासनिक की गिरफ्तारी के बाद से वह एक साल से अधिक समय जेल में रहीं। सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिलने के बाद अब उन्हें बड़ी राहत मिली है। अदालत के आदेश के बाद उनकी रिहाई की प्रक्रिया संबंधित कानूनी औपचारिकताओं के पूरा होने पर आगे बढ़ेगी।
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वहीं, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर को भी शीर्ष अदालत ने जमानत प्रदान की है। दोनों पर CGPSC परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की जांच चल रही है।
CGPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं को लेकर यह मामला काफी समय से चर्चा में है। जांच एजेंसियों ने परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और अन्य संदिग्ध लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी।
मामले में आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने और नियमों के उल्लंघन से संबंधित गतिविधियां हुईं। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। आरोपितों को अदालत में अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने दोनों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के बाद नियमित जमानत देने का फैसला किया। जमानत का अर्थ यह नहीं है कि मामले में आरोप समाप्त हो गए हैं या आरोपी दोषमुक्त हो गए हैं। मुकदमे की कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
अदालत द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन दोनों आरोपियों को करना होगा।
जमानत मिलने के बावजूद CGPSC मामले की जांच और उससे जुड़ी न्यायिक कार्यवाही पर इसका कोई स्वत: अंत नहीं होता। जांच एजेंसी मामले में उपलब्ध दस्तावेजों, बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती है।




