CG Tribal Land : रायपुर। छत्तीसगढ़ में आदिवासी भूमि की खरीद-बिक्री और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर प्रशासन ने सख्ती बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले लोगों के लिए यह महत्वपूर्ण खबर है। आदिवासी भूमि से जुड़े मामलों में अब दस्तावेजों की गहन जांच और रिकॉर्ड के सत्यापन पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य नियमों के विपरीत भूमि हस्तांतरण और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जे जैसे मामलों पर रोक लगाना है।
आदिवासी जमीन के रिकॉर्ड की होगी जांच
आदिवासी भूमि से जुड़े मामलों में राजस्व रिकॉर्ड, स्वामित्व और भूमि हस्तांतरण से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी। अधिकारियों द्वारा यह देखा जाएगा कि संबंधित जमीन का वास्तविक स्वामी कौन है और भूमि का हस्तांतरण नियमानुसार हुआ है या नहीं।
जमीन की रजिस्ट्री से पहले दस्तावेजों के सत्यापन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे ऐसे मामलों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जिनमें दस्तावेजों में गड़बड़ी या नियमों का उल्लंघन होने की आशंका हो।
गैर-आदिवासियों के कब्जे वाले मामलों पर नजर
प्रशासन की निगरानी ऐसे मामलों पर भी रहेगी, जहां आदिवासी भूमि पर गैर-आदिवासी व्यक्ति के कब्जे या स्वामित्व का दावा सामने आता है। भूमि कानूनों के तहत आदिवासी जमीन के हस्तांतरण को लेकर विशेष प्रावधान हैं। ऐसे में किसी भी लेनदेन से पहले संबंधित नियमों और अनुमति की स्थिति की जांच जरूरी होगी।
जांच के दौरान पुराने राजस्व रिकॉर्ड और वर्तमान दस्तावेजों का मिलान भी किया जा सकता है। इससे जमीन के वास्तविक स्वामित्व को लेकर स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलेगी।
रजिस्ट्री कराने वालों को बरतनी होगी सावधानी
आदिवासी भूमि से संबंधित जमीन खरीदने वाले लोगों को रजिस्ट्री से पहले सभी दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच करानी चाहिए। केवल बिक्री दस्तावेज या वर्तमान रिकॉर्ड के आधार पर जमीन का सौदा करना जोखिम भरा हो सकता है। खरीदारों को भूमि का पुराना रिकॉर्ड, स्वामित्व और हस्तांतरण की वैधानिक स्थिति की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
दस्तावेजों की जांच के दौरान यदि भूमि हस्तांतरण में नियमों का उल्लंघन या रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।




