अमेरिका में इल्हान उमर से मिले राहुल:उमर ने PoK को पाकिस्तान का हिस्सा कहा था; अमित शाह बोले- राहुल देश विरोधी ताकतों के साथ

अमेरिका दौरे के आखिरी दिन मंगलवार देर रात राहुल गांधी ने वॉशिंगटन डीसी में अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। रेबर्न हाउस में हुई इस मुलाकात में भारत विरोधी बयान देने वालीं इल्हान उमर भी मौजूद थीं।

राहुल के इल्हान से मिलने पर देश में विरोध शुरू हो गया है। के कई नेताओं ने राहुल के उनसे मिलने की आलोचना की है।

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि देशविरोधी बातें करना और देश को तोड़ने वाली ताकतों के साथ खड़े होना राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की आदत सी बन गई है।

चाहे जम्मू-कश्मीर में देशविरोधी और आरक्षण विरोधी एजेंडे का समर्थन करना हो, या फिर विदेशी मंचों पर भारत विरोधी बातें करनी हो, राहुल गांधी ने देश की सुरक्षा और भावना को हमेशा आहत किया है।

बीजेपी प्रवक्ता संजू वर्मा ने कहा कि उन्होंने कहा कि राहुल सत्ता में आने के लिए उतावले हैं इस वजह से ही वे एक कट्टरपंथी नेता से मिल रहे हैं।

40 साल की इल्हान उमर सोमालियाई-अमेरिकी राजनेता हैं, जो साल 2019 में मिनिसोटा से चुनाव जीतकर अमेरिका के निचले सदन में आई थीं। वह अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस में पहुंचने वाली पहली दो मुस्लिम महिला सांसदों में से एक हैं। अमेरिकी संसद में पहुंचने वाली वह पहली सोमालियाई-अमेरिकी नागरिक भी हैं। मूल रूप से वह अफ्रीका की नागरिक भी रही हैं। उनका परिवार 1991 में सोमालियाई गृहयुद्ध के चलते देश छोड़कर अमेरिका आया था।

इल्हान उमर पहले कई बार भारत विरोधी रुख अपना चुकी हैं। वह को पाकिस्तान का हिस्सा बता चुकी हैं। उन्होंने 2022 में पाकिस्तान का दौरा किया था। इस दौरान वो पाक अधिकृत कश्मीर भी गई थीं। इसकी फंडिंग पाकिस्तान सरकार ने की थी। उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और इमरान खान से भी मुलाकात की थी। भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जाहिर की थी। सरकार ने उमर के पाकिस्तान और  के दौरे को ओछी राजनीति बताया था।

जून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका की स्टेट विजिट पर गए थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी संसद के जॉइंट सेशन को संबोधित किया था। इल्हान उमर ने इस सेशन का बहिष्कार किया था। उन्होंने PM मोदी पर आरोप लगाया था कि उनकी सत्ता में अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव होता है।

प्रेस क्लब के इवेंट से पहले राहुल गांधी ने यूएस लॉ मेकर्स से मुलाकात की।
प्रेस क्लब के इवेंट से पहले राहुल गांधी ने यूएस लॉ मेकर्स से मुलाकात की।

अमेरिकी सांसदों से मिलने के बाद राहुल गांधी ने नेशनल प्रेस क्लब में मीटिंग की। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर  और  मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चीन ने लद्दाख में दिल्ली जितनी जमीन पर कब्जा कर लिया है।मोदी चीन को संभाल नहीं पा रहे हैं।

2014 से लेकर अब तक भारत में राजनीति नाटकीय रूप से बदल गई है। हम ऐसे दौर में पहुंच गए हैं जो हमने भारत में पहले कभी नहीं देखा था। यह आक्रामक, हमारे लोकतांत्रिक ढांचे की नींव पर हमला है।

भारत का 90% हिस्सा या तो आदिवासी, निचली जाति, दलित या अल्पसंख्यक हैं। सरकार, विभिन्न संस्थानों और मीडिया में उनकी भागीदारी की कमी है। हम जाति जनगणना की तरह ही वास्तविकता सामने लाने के लिए भारत में एक सर्वेक्षण का प्रस्ताव रख रहे हैं।

 मेरे और INDIA गठबंधन के लिए सवाल यह है, क्या भारत निष्पक्ष है? हम कई सालों से आजाद हैं, लेकिन हम असल में कितनी दूर आ गए हैं? जाति का विचार अभी भी जिंदा है। हम भारत में निष्पक्षता पर डेटा चाहते हैं, और एक बार डेटा आने के बाद, हम असंतुलन को ठीक करने के लिए नीतियां प्रस्तावित कर सकते हैं।

हम जो कह रहे हैं वह केवल आरक्षण के विचार से अलग है। जो हो रहा है उसे ठीक करने के लिए नीतियां बनाकर लागू करना चाहते हैं, जिसमें आरक्षण भी एक है। किसी ने मेरी बात को गलत तरीके से पेश किया कि मैं आरक्षण के खिलाफ हूं। हम आरक्षण को 50% से आगे बढ़ाने जा रहे हैं।

 चीनी सैनिकों ने लद्दाख में दिल्ली के आकार की जमीन पर कब्जा कर रखा है। यह एक आपदा है। मीडिया इसके बारे में लिखना पसंद नहीं करता। अमेरिका कैसे रिएक्ट करता, क्या राष्ट्रपति यह कहकर बच जाते मामला अच्छी तरह से संभाला है? मोदी चीन को नहीं संभाल पा रहे हैं।

 पहले पश्चिमी देश, अमेरिका, यूरोप और भारत उत्पादक हुआ करते थे, लेकिन फिर हमने उत्पादन बंद करने का फैसला किया और इसे चीन को सौंप दिया। भारत जैसे देश के लिए, मैन्युफैक्चरिंग की उपेक्षा और सर्विस को बढ़ावा देने का मतलब है कि भारत अपने लोगों के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर प्रदान नहीं कर सकता।

मुझे नहीं लगता कि इंडियन पॉलिसी पर ट्रंप या कमला हैरिस में बहुत ज्यादा मतभेद होंगे। दोनों देशों के बीच संबंधों को दोनों तरफ से बुनियादी तौर पर स्वीकार किया जाता है। इसलिए मुझे नहीं लगता कि इस मुद्दे पर मोदी से कोई ज्यादा मतभेद होगा, लेकिन मैं पूरी तरह गलत भी हो सकता हूं।

हमें राजनीतिक यात्रा निकालने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि लोकतंत्र में कुछ भी काम नहीं कर रहा था। हम गए और यह काम कर गया। पर्सनली मैं हमेशा से ऐसा करना चाहता था। बचपन से ही सोचता था कि मुझे अपने जीवन के किसी मोड़ पर अपने देश में घूमना चाहिए और देखना चाहिए कि यह क्या है।

चुनाव के दौरान हमारे पास कोई पैसा नहीं था। हमारे बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए गए थे। भारतीय इतिहास में, मैं मानहानि के लिए जेल की सजा पाने वाला एकमात्र व्यक्ति हूं, मेरे खिलाफ 20 मामले हैं। हमारे पास एक मुख्यमंत्री है जो अभी जेल में है।

 इससे पहले राहुल ने मंगलवार को जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी में आरक्षण खत्म करने के सवाल पर जवाब दिया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस तभी आरक्षण खत्म करने के बारे में सोचेगी, जब देश में सभी को समान अवसर मिलने लगेंगे। फिलहाल भारत में ऐसी स्थिति नहीं है।”

राहुल के इस बयान के बाद भारत में मायावती ने उनके बयान की निंदा की है। उन्होंने कहा, “राहुल के नाटक से सतर्क रहें, वे आरक्षण को खत्म करने की साजिश में जुटे हैं।” वहीं भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राहुल के आरक्षण पर दिए बयान को लेकर निशाना साधा।

भाजपा नेता ने कहा कि “आरक्षण का विरोध उनकी विरासत है। राहुल जिस संविधान को लेकर घूमते हैं, उसी के साथ सबसे बड़ा छलावा और धोखा कर रहे हैं।”

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ये आरक्षण खत्म करने की सोची समझी रणनीति और षडयंत्र है। उनका संविधान की रक्षा का दावा एक ढकोसला है। राहुल गांधी जब भी विदेश जाते हैं उनका मकसद भारत को नीचा दिखाना और अपमानित करना होता है। उनका वहां चीन के प्रति प्रेम उभर आता है।

कांग्रेस आरक्षण खत्म करने के बारे में तब सोचेगी, जब सही समय होगा। जब आप वित्तीय आंकड़ों को देखते हैं, तो आदिवासियों को 100 रुपए में से 10 पैसे मिलते हैं, दलितों को 100 रुपए में से 5 रुपए मिलते हैं और  को भी लगभग इतनी ही रकम मिलती है।

 भारत के दलित,, आदिवासी को उनका हक नहीं मिल रहा है। देश के 90% आबादी वाले , दलित और आदिवासी इस खेल में ही नहीं हैं। जातिगत जनगणना यह जानने का आसान तरीका है कि निचली जातियां, पिछड़ी जातियां और दलित किस स्थिति में हैं।

 हमारा गठबंधन इस बात पर सहमत है कि भारत के संविधान की रक्षा की जानी चाहिए। भारत के बिजनेस को सिर्फ दो लोग अडाणी और अंबानी नहीं चला सकते। हमने बार-बार गठबंधन सरकारें चलाई हैं, जो सफल रही हैं। हमें पूरा यकीन है कि हम ऐसा फिर से कर सकते हैं।

 एजुकेशन सिस्टम पर  का कब्जा है। मीडिया और जांच एजेंसियों पर उनका कब्जा है। मैंने संविधान को सामने रखना शुरू किया। लोगों ने समझा कि जो संविधान की रक्षा कर रहे हैं और जो इसे नष्ट करना चाहते हैं, यह उनके बीच की लड़ाई है। मुझे नहीं लगता कि निष्पक्ष चुनाव होते तो  246 के करीब होती।

 हम समान नागरिक संहिता पर तभी कुछ कहेंगे जब पता चलेगा कि का प्रस्ताव क्या है। हमने इसे नहीं देखा है। हमें नहीं पता कि वे किस बारे में बात कर रहे हैं। हमारे लिए इस पर टिप्पणी करने का कोई मतलब नहीं है। जब वे इसे लाएंगे, तब हम इसे देखेंगे और इस पर टिप्पणी करेंगे।

जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ राहुल ने फोटो खिंचवाई।
जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ राहुल ने फोटो खिंचवाई।

 राहुल गांधी ब्रिटेन के दौरे पर थे। उन्होंने और ED का हवाला देते हुए भारत सरकार की तुलना पाकिस्तान सरकार से की थी।  ने राहुल पर विदेश में जाकर भारत को बदनाम करने का आरोप लगाया।

 राहुल गांधी नानी से मिलने इटली गए। वे कांग्रेस के स्थापना दिवस में शामिल नहीं हुए। कुछ महीने बाद पंजाब, गोवा, उत्तराखंड, मणिपुर और  में चुनाव हुए। कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। राहुल पर आरोप लगा कि इटली जाने के लिए उन्होंने पंजाब में रैली को कैंसिल करवा दी।

भारत में के खिलाफ बड़ा आंदोलन चल रहा था। राहुल गांधी तब दक्षिण कोरिया चले गए थे। उनकी इस यात्रा को लेकर कई कांग्रेसी नेताओं ने भी सवाल उठाए थे।

हरियाणा और महाराष्ट्र में होने वाले चुनाव से सिर्फ 15 दिन पहले राहुल गांधी कंबोडिया चले गए। ने कहा कि राहुल गांधी पर्सनल टूर पर बैंकॉक गए हैं। वहीं, कांग्रेस ने कहा कि वे मेडिटेशन के लिए कम्बोडिया गए हैं।

राहुल गांधी विपक्ष के नेता के तौर पर पहली बार विदेश दौरे पर हैं। वे रविवार को अमेरिका के टेक्सास राज्य पहुंचे। यहां उन्होंने 2 कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। पहले उन्होंने डलास में भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की।

इसके बाद राहुल गांधी ने सोमवार को यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के छात्रों से भारतीय राजनीति, इकोनॉमी और भारत जोड़ो यात्रा समेत कई मुद्दों पर चर्चा की।

राहुल ने कहा, “भारत में सब मेड इन चाइना है। चीन ने प्रोडक्शन पर ध्यान दिया है इसलिए चीन में रोजगार की दिक्कतें नहीं हैं।”

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