कोरबा लोक आस्था के छठ महापर्व के चौथे दिन की सुबह छठ व्रतियों के उगते सूर्य भगवान को अर्घ्य देने के साथ ही समापन हो गया। इसके बाद सभी छठ व्रतियों ने व्रत का पारण किया। मान्यता है कि सूर्योदय के समय अर्घ्य देने से सुख-समृद्धि, सौभाग्य, संतान प्राप्ति की मनोकामना और संतान की रक्षा का वरदान मिलता है।
छठ महापर्व के आखिरी दिन सूर्योदय के दौरान अर्घ्य देते समय मंत्र-ओम एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते, अनुकंपय माम् भक्तया गृहाणाघ्र्यम् दिवाकर का जाप किया गया। महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान नहाय-खाय के साथ आरंभ हुआ था। पहले दिन व्रतियों ने यहां गंगा स्नान के साथ सूर्यदेव को जल से अर्घ्य दिया। इसके बाद पूरी पवित्रता के साथ अरवा चावल, चना दाल, कद्दू की सब्जी और आंवले की चटनी आदि का भोग लगाकर प्रसाद तैयार किया। खरना पूजन के दिन व्रतियों ने पूरे दिन उपवास कर शाम में भगवान का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण किया। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हुआ। सोमवार को व्रतियों ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया।
28 अक्टूबर की सुबह श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर पूजा का समापन किया। इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास भी समाप्त हो गया। इस अवसर पर व्रती महिलाओं ने जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया और परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की दीर्घायु तथा जीवन में ऊर्जा की कामना की। श्रद्धा और आस्था से परिपूर्ण इस पर्व के अंतिम दिन कोरबा शहर और आसपास के सभी घाटों पर विशेष चहल-पहल रही। बालको डेंगू नाला, सर्वमंगला घाट, शिवघाट, सीएसईबी तालाब सहित ऊर्जाधानी के विभिन्न छठ घाटों पर व्रती और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाएं पारंपरिक परिधान में सजे थालों में प्रसाद लेकर घाटों तक पहुंचीं। व्रतियों ने जल में खड़े होकर पवित्रता के साथ फल, मिष्ठान, नारियल, पान-सुपारी, फूल, अर्कपात से भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की कुशलता के लिए प्रार्थना की। अर्घ्य व पूजन करने के बाद व्रतियों ने घाट पर पारण कर पर्व का समापन किया। पुलिस और प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा व व्यवस्था की विशेष तैयारियां की थीं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। अर्घ्य व पूजन करने के बाद व्रतियों ने घाट पर पारण कर पर्व का समापन किया।
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