Thursday, January 15, 2026

मकर संक्रांति की पूर्व संध्या वैदिक मंत्रोच्चार से हुआ हसदेव गंगा महाआरती

मकर संक्रान्ति की पूर्व संध्या पर महान तपस्वी एवं साधक तपसी महाराज की पुण्य तपोभूमि डोंगा घाट हनुमान मंदिर परिसर में हसदेव गंगा महाआरती का आयोजन किया गया । चांपा सेवा संस्थान के द्वारा यह 14 वां महाआरती था , श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रहा ‌। हसदेव नदी के तट पर भक्तिमय वातावरण में और असंख्य दीपों की सुसज्जित आभा ने श्रद्धालु भक्तों के मन को असीम शांति प्रदान किया । हसदेव महाआरती का लाईव प्रसारण तथा समाचार संकलन के लिए जगदीश पटेल सीजी लाईव के निर्देश पर कार्यक्रम स्थल पर शशिभूषण सोनी शुरू से अंत तक मौजूद रहे ।

तपसी आश्रम डोगा घाट की प्रसिद्धि

नगर के हदय पर स्थित तपस्वी जी महाराज की तपोभूमि जिसे तपसी आश्रम डोंगा घाट के नाम से जाना जाता हैं । यह हसदेव सरिता के सुंदर तट पर स्थित पवित्र और प्राचीन मंदिर हैं । इस मंदिर में संगमरमर से बने रामभक्त हनुमान अपने दोनों कांधों पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण को उठाए तथा अपने पैरों से राक्षस को रौधते हुए दिव्य मूर्ति विराजमान हैं । इस मंदिर में संलग्न राम, लक्ष्मण और माता सीता की श्रृंगार युक्त प्रतिमा स्थापित हैं जिसे देखते हुए नयन अपने आप ही श्रद्धालु की झुक जाता हैं । मंदिर के अंदर एक छोटी-सी छतरी की छाया में शिवलिंग स्थापित है जिसे तपसी महराज की तपस्थली के प्रथम स्थल के रुप में ऐतिहासिक महत्ता हैं। तपस्वी महराज के बारें में नंदकुमार देवांगन तथा डॉ शांति कुमार स्वर्णकार कहते हैं कि इसके तपोबल में इतनी शक्ति थी कि वे मृत शरीर को भी नवजीवन प्रदान कर देते थे ।

नदी के तट पर दिखा भक्ति-भाव

साहित्यकार शशिभूषण सोनी ने बताया कि मकर संक्रांति एक महत्वपूर्ण हिंदू त्यौहार माना जाता हैं, जो कि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के अवसर पर मनाया जाता हैं । पर्व हमें प्रकृति की सुंदरता और महत्व को समझने का अवसर प्रदान करता हैं । यह पर्व हम अपने प्रियजनों के साथ मिलकर अपने संबंध को प्रगाढ़ बनाते हैं ।

वैदिक मंत्रोच्चार से उपचारित महाआरती दर्शनीय

हसदेव नदी के तट पर भक्तिमय वातावरण और दीपों की सुसज्जित आभा ने श्रद्धालु भक्तों के मन को असीम शांति प्रदान किया । चांपा सेवा संस्थान के द्वारा जैसे ही वैदिक मंत्रोच्चार से महाआरती शुरू हुई बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त अपने दोनों हाथ जोड़कर भक्तिभाव से खड़े होकर ध्यान मग्न दिखाई पड़े ‌। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु घाट पर पहुंचकर बारी-बारी से महाआरती करते दिखाई दिए । वही बहुत लोगों ने दूर से हाथ जोड़कर पूजा-अर्चना में तल्लीन हो गये । इसके पश्चात मंदिर में जाकर विग्रहों का दर्शन किए।

मकर संक्रांति पर दान-पुण्य और तिल व गुड़ का वितरण

मकर संक्रांति पर्व जीवन में नवजीवन प्रदान करता हैं । इस अवसर पर दान-पुण्य करना पुण्यार्थ कार्य हैं ।इस दिन तिल और गुड़ का सेवन तथा वितरण करना शुभ माना जाता हैं। हसदेव महाआरती के बाद मंदिर के तट पर श्रद्धालुओं को तिल-लड्डू, रेवड़ी और पेड़ा का प्रसाद वितरण किया गया ।

जहां दीप भक्ति और आस्था एक साथ बहा

चांपा सेवा संस्थान के समर्पित कार्यकर्ताओं ने मानों तो मैं गंगा मां हूं और ना मानों तो बहता पानी,जो स्वर्ग ने दी इस धरती को मैं हूं प्यार की यही निशानी। गंगा मैया,ओ गंगा मैय्या की तरह अनेक गीतों की श्रृंखलाबद्ध लय और मधुर ध्वनि सुनकर डोगा घाट हसदेव नदी तट पर लोगों का दिल भर आया । उल्लेखनीय हैं कि चांपा सेवा संस्थान के द्वारा अनवरत 14 वर्षों से मकर संक्रांति के पूर्व संध्या तो कभी मंकर संक्रांति के दिन हनुमान मंदिर डोगाघाट के तट पर हसदेव गंगा महाआरती का आयोजन किया जा रहा हैं ।

महाआरती में सहभागिता

इस अद्वितीय , अलौकिक और अविस्मरणीय अवसर पर चांपा सेवा संस्थान के अध्यक्ष मनोज कुमार मित्तल , पं नारायण दास महंत, पं पद्मेश शर्मा,डीबी तनिष्क के प्रोप्राइटर धीरेन्द्र बाजपेयी, विनोद कुमार तिवारी महराज , वल्लभ , नपाध्यक्ष प्रदीप नामदेव, लक्ष्मण थावाणी,पुरुषोत्तम शर्मा ,गणेश श्रीवास, महेंद्र तिवारी, संतोष कुमार थवाईत , राजेंद्र वर्मा , डॉ बृजमोहन जागृति, डॉक्टर राम खिलावन यादव , शशिभूषण सोनी, शांति कश्यप कोसमंदा , सत्यनारायण सोनी , सुशांत चौधरी, कृष्ण कुमार देवांगन, डॉ भोलेश्वर सोनी, अनुराधा श्रीवास,दिलीप सोनी,शैलेष शर्मा , श्रीमति ज्योति वनकर, पद्मा , मणि माला शर्मा, डॉ श्रीमति धनेश्वरी जागृति , रजनी-सिद्धनाथ , हेमा ,अन्नपूर्णा सोनी, मीरा चौधरी, गुंजा ,दुराई , धार्मी देवांगन , शशि सोनी,शांता गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए ।

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