कोरबा अंचल के बीच स्थित रानी धनराज कुंवर चिकित्सालय में अव्यव्स्था का आलम यह हैं की न तो समय पर चिकित्सक पहुंच रहे, न ही कर्मचारी आ रहे हैं। आरोप हैं की चिकित्सालय के लैब से थाइराइड और शरीर में विटामिन, सोडियम पोटेशियम जांच की जांच भी अघोषित तौर पर बंद कर दी गई है। यहां कार्यरत बड़े चिकित्सक मरीजों का इलाज गंभीरता पूर्वक करने के बजाए सामान्य तौर कर रहे हैं।
आरोप लगाते हुए जानकारी दी जा रही हैं की बिना जांच किए लक्षण के आधार दवाइयां देकर चिकित्सालय से टरका रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि है चिकित्सालय में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में भारी गिरावट आई है। प्रसूता वार्ड को छोड़कर चिकित्सालय के सभी बेड खाली पड़े हैं।
मीडिया से चर्चा के दौरान एक महिला मरीज परिवार के सदस्य ने बताया है कि चिकित्सालय में इलाज कम अव्यवस्था अधिक है। अपनी बहू को लेकर वह महिला विशेषज्ञ चिकित्सक से मिलने आई है। बहू के पेट में दर्द है। चिकित्सक ने सोनोग्राफी के लिए कहा है। लेकिन सोनोग्राफी सेंटर से उसी दिन रिपोर्ट नहीं मिल रही है। दो हफ्ते की लाइन है। महिला विशेषज्ञ चिकित्सक भी समय पर नहीं बैठ रही हैं। इससे परेशानी बढ़ रही है। इलाज कराने चिकित्सालय पहुंची पुरानी बस्ती की एक महिला ने भी यहां फैली अव्यस्था की ओर इशारा करते हुए विशेषज्ञ चिकित्सक के समय पर ओपीडी में नहीं बैठने की बात कही।
इस मसले को लेकर सीएमएचओ से उनका पक्ष जानने संपर्क किया गया पर उनसे बात नहीं हो पायी।
* आईपीडी में आई भारी गिरावट
बताया जा रहा हैं की चिकित्सा अधिकारी द्वारा चिकित्सालय में ध्यान नहीं दिए जाने से आईपीडी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। रोजाना की आईपीडी बड़ी मुश्किल से दो तीन तक सीमट कर रह गई है। महीने की आईपीडी 100 से नीचे खिसक गई हैं। जबकि पूर्व में इस अस्पताल की आईपीडी सेवाए महीनें में 350 के लगभग होती थीं।
* तीन विशेषज्ञ चिकित्सक लेकिन दूसरी पाली में कोई नहीं पहुंचता चिकित्सालय
आरोप लगाते हुए बताया जा रहा हैं की रानी धनराज कुंवर चिकित्सालय में मरीजों की सुविधा के लिए यहां तीन विशेषज्ञ चिकित्सक की पदस्थापना की गई है। इसमें दो स्त्री रोग विशेषज्ञ सहित शिशु रोग विशेषज्ञ शामिल हैं। तीनों विशेषज्ञ चिकित्सक रानी धनराज कुंवर चिकित्सालय में तीन घंटे बैठते हैं। इसमें भी बड़ी मुश्किल से तीनों एक समय में कभी अपने कक्ष में मरीजों का इलाज करने के लिए उपलब्ध नहीं होते हैं। आरोप हैं की जिस महिला चिकित्सक को जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने इस अस्पताल का प्रभारी चिकित्सा अधिकारी नियुक्ति किया है, वह कभी दूसरी पाली में चिकित्सालय नहीं पहुंचती हैं। इससे धनराज कुंवर चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई है।
सही इलाज नहीं मिलने के कारण धनराज कुंवर चिकित्सालय से मरीजों ने बढ़ाई दूरी-आईपीडी के सभी बेड खाली
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