न्यूज जांजगीर-चांपा । भक्ति एक ऐसा मार्ग हैं जो हमें अपने लक्ष्य तक पहुंचाने में मदद करता हैं । यह एक ऐसा माध्यम हैं, जो हमें ईश्वर प्राप्ति करता है और हमें उसके चरणों तक पहुंचाता हैं । ज्ञान और भक्ति दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और हमें अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायक भी होते हैं , उक्त उद्गार डॉ स्वामी युगल शरण महाराज ने हनुमान मंदिर प्रांगण चांपा में दिनांक 30 नवंबर से 20 दिसंबर तक आयोजित 21 दिवसीय आध्यात्मिक ज्ञान देते हुए कही ।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा महात्म्य में भक्ति से ही लक्ष्य मिलता हैं । भक्ति से ही सत्संग मिलता हैं ।अगर मनुष्य को सत्संग का अवसर मिल जाएं तो जीवन बदल जाता हैं ।
महराज जी ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को स्वधर्म का पालन करना चाहिए। स्वधर्म का पालन करने से स्वर्ग का सुख मिलता हैं। गीता में कथन हैं कि भगवान की शरण में आ जाओं । भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत में अर्जुन को उपदेश देते हुए कहा । जगदीश भाई पटेल सीजी टाईम्स संपादक की ओर से प्रवचन का रसास्वादन करने सहयोगी लेखक शशिभूषण सोनी प्रारंभ से अंत तक रहे ।
भगवान की भक्ति के तीन मार्ग
भगवान की भक्ति से ही हम सब ईश्वर तक पहुंच सकते हैं। भक्ति के तीन मार्ग हैं – कर्म, भक्ति और ज्ञान! स्वामी जी ने कहा कि कर्म मार्ग को अपनाने वाले व्यक्ति ज्ञानी कहलाते हैं। भक्ति का मार्ग अपनाने वाले को भक्त कहलाते हैं, लेकिन वास्तविक लक्ष्य की प्राप्ति का एक ही मार्ग हैं, और वह भक्ति मार्ग हैं । भक्ति के अंदर भगवान रहते हैं ।
भक्ति की विशेषता ! साधना भक्ति करनी चाहिए और शुद्धा भक्ति पाना हैं
डॉ स्वामी जी ने कहा कि भक्ति के विभिन्न स्तर हैं जिनमें मुख्यतः साधना भक्ति, भाव भक्ति,प्रेमा भक्ति,स्नेह भक्ति,मान भक्ति,राग भक्ति, प्रणय भक्ति,अनुराग भक्ति, भाववेश भक्ति और महाभाव भक्ति। डॉ महराज ने ने भक्ति के प्रकारों का विशद वर्णन करते हुए कहा कि हमें साधना भक्ति करनी चाहिए और शुद्धा भक्ति को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए ।
आध्यात्मिक यात्रा में सहभागी
प्रवचन यात्रा में शामिल विजय कुमार पाण्डेय पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चांपा, डॉ जी पी दुबे, कृष्ण कुमार देवांगन, सुनील सोनी, राजकुमार सोनी, नंदकुमार देवांगन, एम एल पारीख, लखनलाल सोनी, नंदकिशोर सोनी,श्रीमति संतोषी सराफ, श्रीमति नेहा अविनाश अग्रवाल,शशिप्रभा सोनी, कविता थवाईत सहित असंख्य लोग शामिल रहे।




