सतनामी कल्याण समिति कुसमुंडा द्वारा राजा गुरु बालक दास की 220वीं जयंती समारोह मनाई गई। मुख्य अतिथि एसईसीएल कुसमुंडा परियोजना के वरिष्ठ प्रबंधक एस.एल. धैर्य थे। अध्यक्षता जी.आर. भास्कर, वरिष्ठ प्रबंधक एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र ने की। विशिष्ट अतिथि के.पी. पाटले, एच.आर. ओग्रे एवं भुवनेश्वर दिव्य उपस्थित रहे।
उक्त समारोह का शुभारंभ स्वागत भाषण के साथ अध्यक्ष राजेन्द्र कुमार लहरे ने किया। उपाध्यक्ष मोतीराम दिवाकर, प्रेमपाल सांडे, हृकेश भारती एवं कुरुराम सोनवानी ने अतिथियों का स्वागत किया। समिति के कार्यकारी अध्यक्ष एवं मंच संचालक डॉ. सुरेन्द्र कुमार खुंटे ने कहा कि राजा गुरु बालक दास ने रावटी प्रथा की शुरुआत कर समाज में सहयोग और एकता की परंपरा को बल दिया।
उन्होंने सतनाम सेना की स्थापना कर समाज को आत्मरक्षा एवं संगठन की शक्ति प्रदान की। वे गांव-गांव भ्रमण कर लोगों को सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते रहे। अंग्रेजी शासन ने उनके योगदान को देखते हुए उन्हें राजा की उपाधि दी तथा शस्त्र रखने की अनुमति भी प्रदान की। वे हाथी पर सवार होकर पूरे छत्तीसगढ़ का भ्रमण करते थे और आजीवन सतनाम पंथ को मजबूत करते रहे। मुख्य अतिथि धैर्य ने समारोह की प्रशंसा की और इसे समाज की एकता एवं जागरूकता का प्रतीक बताया। भास्कर जी ने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को बढ़-चढ़कर सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेना चाहिए। समिति के सचिव तुलाराम कठौते ने आभार प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।
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