Wednesday, February 11, 2026

14 साल से खा रहे थे नींद की दवा, आंख में रोशनी की कमी, घुटने का दर्द, घबराहट सभी से मिली निजात आयुर्वेद चिकित्सा से दो माह में ही हो गया सब रोग छूमंतर

आजकल अवसाद (एंग्जायटी) की समस्या एक आम बीमारी बनती जा रही है, जिससे पीड़ित लोगों को नींद न आना, घबराहट होना, दिल की धड़कन का बढ़ जाना, बेचैनी लगना, आदि अनेक तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मुड़ापार निवासी रामरतन साह भी ऐसी समस्या से जूझ रहे थे और 14 वर्षों से नींद की दवा का सेवन कर रहे थे पर उनकी परेशानी कम होने का नाम ही नहीं ले रही थी। रामरतन साह ने बताया की वो 14 वर्षों से अधिक समय से घबराहट, बेचैनी, डर, नींद न आना, किसी काम में मन न लगना आदि समस्या से पीड़ित थे। उनकी हालत इतनी खराब थी कि वो ठीक से अपनी समस्या भी किसी से नहीं बता पाते थे न बात कर पाते थे। जिससे बचाव हेतु वो नींद की दवा लेने लगे पर उनकी परेशानी बढ़ती गई जिससे उनकी आँखों की रोशनी भी कम होने लगी, घुटने में दर्द होने लगा । सभी तरह के उपाय से थक कर परेशान रामरतन साह ने अंत में आयुर्वेद पर भरोसा करने का फैसला किया। थक हारकर रामरतन साह निहारिका स्थित श्री शिव औषधालय पहुंचे, जहां मौजूद चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने मरीज की त्रिविध परीक्षा कर उनका नाड़ी परीक्षण किया l इसके बाद, उन्होंने आयुर्वेदिक दवाइयां, नियम और परहेज बताए। रामरतन साह ने डॉक्टर के निर्देशों का पालन पूरी निष्ठा से किया और फिर चमत्कार हो गया। मात्र 2 महीने में ही रामरतन साह पूरी तरह से स्वस्थ हो गए। उनकी घबराहट, बेचैनी, डर, नींद न आना, किसी काम में मन न लगना आदि सब समस्या छूमंतर हो गई और उनकी आँखों की धीमी पड़ती रोशनी भी ठीक हो गई। अब वे अपनी सभी समस्याओं से से पूरी तरह निजात पा चुके हैं। और उनकी नींद की गोली भी छूट गई है। इसके लिये रामरतन साह आयुर्वेद के इस उपचार को किसी चमत्कार से कम नहीं मानते, जहां वे नींद की गोली खाने के आदी हो गये थे और उन्हें किसी तरह की कोई आशा की किरण नहीं दिख रही थी। वहीं वे मात्र परहेज और नियमों का पालन करके 2 माह में ही पूरी तरह स्वस्थ हो गए और नींद की गोली भी छूट गई। रामरतन साह का कहना है कि उन्हें भरोसा ही नहीं था की आयुर्वेद दवा इतनी जल्दी और इतना अच्छा काम करती है। अब उन्हें आयुर्वेद पर पूरा भरोसा हो गया है और अब वे अपने परिवार को भी आयुर्वेद चिकित्सा के लिये नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा के पास लायेंगे बल्कि दूसरों को भी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को अपनाने की सलाह देंगे। उनका अनुभव यह साबित करता है कि आयुर्वेद में गंभीर बीमारियों का सफल इलाज संभव है। यह उन लोगों के लिए आशा की किरण है जो अवसाद (एंग्जायटी), अनिद्रा, घबराहट जैसी मानसिक बीमारियों से जूझ रहे हैं और अज्ञात भय से डर रहे हैं। इसके लिये उन्होंने चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि यह चमत्कार मेरा नहीं आयुर्वेद का है। आयुर्वेद जो संपूर्ण जगत के प्राणीयों के लिये हैं, जो ऋषियों एवं आचार्यो की देन है, जो शाश्वत है, नित्य है, विशुध्द और निरापद है। हम उस विधा के अनुयायी हैं, शिष्य हैं, चिकित्सक हैं। और इस पर हमें घमंड नहीं अपितु गर्व है की हम उस ऋषि परंपरा के संवाहक हैं। यह वाक्या आयुर्वेद चिकित्सा की प्रभावशीलता को दर्शाती है और यह साबित करती है कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धतियों में गंभीर बीमारियों का इलाज संभव है। आयुर्वेद के प्रति लोगों का विश्वास तेजी से बढ़ रहा है, और इस तरह की सफलताएं इसे और भी मजबूती प्रदान करती हैं। सभी लोगों को अपनी चिकित्सा के लिये प्राथमिकता के तौर पे आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को पहली प्राथमिकता देकर आयुर्वेद को अपनाना चाहिए।

श्री रामरतन साह जी का संबंधित वीडियो जैसा उन्होंने बताया।
फोटो- नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा रामरतन साह का नाड़ी परीक्षण करते हुये

प्रति,
संपादक/ब्यूरो प्रमुख
उपरोक्त प्रेस विज्ञप्ति को यथोचित स्थान प्रदान करने की कृपा करें।

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