कोरबा। छत्तीसगढ़ के ऊर्जाधानी कोरबा में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा मामला कटघोरा वनमण्डल का है, जहाँ करीब 40 हाथियों के एक विशाल दल ने दस्तक देकर पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। इस संकट की घड़ी में न केवल ग्रामीण, बल्कि ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए पहुँचे पत्रकारों की जान भी आफत में फँस गई। हैरान करने वाली बात यह रही कि पूरी रात दहशत का माहौल रहा, लेकिन मौके से वन विभाग का मैदानी अमला पूरी तरह नदारद पाया गया।
पूरी रात चलता रहा मौत का खेल
जानकारी के अनुसार, शाम ढलते ही हाथियों का दल रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ने लगा। हाथियों की मौजूदगी की खबर पाकर कुछ स्थानीय पत्रकार वस्तुस्थिति का जायजा लेने और ग्रामीणों की समस्या को कवर करने पहुँचे थे। इसी दौरान हाथियों के झुंड ने उन्हें घेर लिया। पत्रकारों और ग्रामीणों को अपनी जान बचाने के लिए घने अंधेरे में इधर-उधर भागना पड़ा। चश्मदीदों के मुताबिक, हाथी इतने करीब थे कि किसी भी वक्त बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
वन विभाग की ‘कुंभकर्णी’ नींद
ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों के मूवमेंट की सूचना समय पर देने के बावजूद वन विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं पहुँचा।
“हम रात भर टॉर्च जलाकर और शोर मचाकर हाथियों को दूर रखने की कोशिश करते रहे, लेकिन वन विभाग का ‘अलर्ट’ सिर्फ कागजों तक सीमित है। मैदानी अमला कहीं नजर नहीं आया।” — एक पीड़ित ग्रामीण
भगवान भरोसे ग्रामीण और उनकी फसलें
कटघोरा के इस इलाके में हाथियों ने न केवल जान का खतरा पैदा किया है, बल्कि खेतों में खड़ी फसलों को भी भारी नुकसान पहुँचाया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और वन विभाग की लापरवाही के कारण वे हर रात मौत के साये में जीने को मजबूर हैं। ग्राउंड रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि हाथियों की निगरानी के लिए बनाए गए ‘एलिफेंट ट्रैकिंग’ सिस्टम और सुरक्षा के दावे धरातल पर पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं।



