Thursday, January 29, 2026

ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य शक्ति और आतंकवाद के ख़िलाफ़ उसकी दृढ़ता को उजागर किया हैं – तांत्रिकचार्य स्वामी सुरेन्द्र नाथ ।

जांजगीर-चांपा । भारतवर्ष की बढ़ती ताकत को रोकने के लिए विश्व में तेजी से नए समीकरण बन रहे हैं । भविष्य में अपनी लड़ाई हमें खुद के भरोसे लड़नी हैं ।

सच्चें राष्ट्रवाद और राष्ट्रहित सर्वोपरि की भावना आवश्यक हैं ।

दैनिक समाचार-पत्रों से सम्बद्ध शशिभूषण सोनी से चर्चा करते हुए अंचल के सुप्रसिद्ध तांत्रिकाचार्यों स्वामी सुरेंद्रनाथ ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर वो, आगाज हैं, जो दुनिया को संदेश देता हैं कि कोई भी आतंकी हमला, अगले युद्ध की शुरुआत होगी और भारत अपने शत्रुओं से निपटने में सक्षम हैं , किन्तु दीमक की तरह राष्ट्र को छलनी करने वाले घर के भेदी ज्यादा खतरनाक हैं, जिनसे निपटने के लिए सिर्फ कानून ही नहीं सच्चे राष्ट्रवाद की आवश्यकता हैं क्योंकि राष्ट्र-हित ही सर्वोपरि हैं।

श्रीकृष्ण और अर्जुन संवाद ! भविष्य में अपनी लड़ाई खुद के भरोसे लड़नी होगी ।

भारत में सेक्युलरिज्म इसलिए हैं , क्योंकि हिन्दू बहुसंख्यक हैं, धर्म पूछकर हत्या करने वालों को नहीं पता कि हम श्रीराम और श्रीकृष्ण के वंशज हैं । महाभारत के समय श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं, यदि शांति चाहिए तो युद्ध करो, अपना हक चाहिए तो युद्ध करो, अपनो के मोह में पड़े बिना युद्ध करो पार्थ , गीता का ज्ञान केवल कथाकारों द्वारा कथा करने के लिए नहीं है, इसे आवश्यकता पड़ने पर लागू करना भी हमें आता हैं । दुनिया को शांति का संदेश देने वाला, किसी भी देश पर प्रथम प्रहार न करने वाला देश-भारत, जब आतंक के विरुद्ध केवल प्रतिशोधात्मक कार्यवाही कर रहा था, तो पाकिस्तान युद्ध की तरह प्रहार कर रहा था, लेकिन केवल तीन दिनों की कार्यवाही में पाकिस्तान को अपनी वस्तुस्थिति का एहसास हो गया, और युद्ध विराम के लिए प्रयास करने में जुट गया।

देश के भीतर गद्दारों और आतंकवाद के विरुद्ध दृढ़ता से निपटने की आवश्यकता हैं ।

स्वामी सुरेंद्रनाथ ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने देश को क्या सिखाया ? देश में देशभक्तों से ज्यादा गद्दारों की संख्या में वृद्धि हो गई हैं, देश के बाहर के खतरे तो दिखाई देते हैं, जो अपने बनकर घर में ही छुपे हैं, सबसे बड़ा खतरा उनसे ही हैं। कल ही 14 लोगों को भारत की खुफिया जानकारी पाकिस्तानी एजेंसियों को साझा करने के कारण गिरफ्तार किया गया हैं । चंद पैसों की खातिर देश की सुरक्षा ही दांव पर लगा दी इन्होंने, ये कोई बड़े पदों पर बैठें नेता या अधिकारी नहीं हैं , कोई सिक्योरिटी गार्ड हैं, कोई यूट्यूब है, तो कोई स्टूडेंट हैं, भारत हमेशा ही शत्रुओं से नहीं अपनो की गद्दारी के कारण हारता आया हैं , इतिहास साक्षी हैं ।

भारत देश नहीं बल्कि विश्व का धर्मशाला हैं ।

पहलगाम हमले के बाद से ना जाने कैसे-कैसे फैक्ट निकलकर सामने आ रहे हैं अगर पाकिस्तानियों को वापस जाने का आदेश न होता तो यहां किसी की 20-20 साल से, किसी की 40 साल से छुपी हुई कहानियां सामने न आतीं, जैसे भारत देश नहीं विश्व का धर्मशाला हैं । देश में बैठें देश के गद्दारों के सहयोग से ही ऐसी घटनाएं होती आईं हैं , पहले भी ये साबित हुआ था, और इस दर्दनाक घटना ने भी सिद्ध किया । जिस मां की कोख से जन्म लेते हैं , उसी के द्रोही हैं, जो पैदा तो भारत में होते और सहयोग पाकिस्तान का करते हैं , ऐसे जय चंदों की वजह से ही भारत मुंह की खाता हैं , लेकिन अब और नहीं, भारत ने जिस तरह से प्रतिकार किया हैं और इस चुनौतीपूर्ण समय में नेताओं और जनता ने एकता का जो परिचय दिया हैं, वो सराहनीय हैं और जिन सेलिब्रिटी और खिलाड़ियों ने चुप्पी साधी वो भी याद रखी जायेगी । ये भारत की जनता हैं, सिर आंखों पर बिठाना भी जानती हैं, और उतारना भी । साथ ही जितने लोग युद्ध के विरोध में बोल रहे थे, उनको भी शत्रु के सहयोगी के रूप में देखा जाना चाहिए।

शांति चाहिए तो युद्ध सबसे जरुरी, महाभारत सबसे सटीक उदाहरण हैं ।

शांति चाहिए तो युद्ध जरुरी हैं, महाभारत इसका सबसे सटीक उदाहरण हैं । कुछ लोग दुर्योधन की तरह हठी होते हैं , जिन्हें स्वयं जगत पति श्रीकृष्ण भी समझा नहीं सके इसलिए ऐसे मूर्ख हठियों को समझाने का एक ही मार्ग हैं , वो हैं युद्ध ! इसीलिए सीजफायर के बावजूद भारत ने पाकिस्तान पर सख्त रुख बनाए रखा हैं । ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी हैं, सिंधु जल संधि स्थगित हैं , अटारी चेक पोस्ट बंद है और व्यापार पर रोक जारी हैं । ऑपरेशन सिंदूर ने भारत को सैन्य, रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक बढ़त दिलाई । सीजफायर के बाद भी भारत ने पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखा हैं, जिससे भविष्य में आतंकवाद पर अंकुश लगने की उम्मीद हैं ।

भविष्य में अपनी लड़ाई हमें खुद ही लड़नी हैं ।

भारत की बढ़ती हुई ताकत को रोकने के लिए विश्व में नए समीकरण बन रहे हैं । भविष्य मे अपनी लड़ाई हमें खुद के भरोसे लड़नी हैं । ऑपरेशन सिंदूर वो, आगाज है, जो दुनिया को संदेश देता है कि कोई भी आतंकी हमला, अगले युद्ध की शुरुआत होगी, और भारत अपने शत्रुओं से निपटने में सक्षम हैं, किन्तु दीमक की तरह राष्ट्र को छलनी करने वाले घर के भेदी ज्यादा खतरनाक हैं, जिनसे निपटने के लिए सिर्फ कानून ही नहीं सच्चे राष्ट्रवाद की आवश्यकता हैं, राष्ट्र के प्रति बेशर्त वफादारी प्रत्येक नागरिक में होनी चाहिए । राष्ट्रहित सर्वोपरि, विशुद्ध राष्ट्रवाद से ही राष्ट्र सुरक्षित रह सकता हैं ।

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