कोरबा कोरबा जिले की मानिकपुर कोल साइडिंग के लिए सेकंड एंट्री गेट के पीछे रेलवे ट्रैक के किनारे कोयला परिवहन करने वाले मालवाहकों के लिए वैकल्पिक सड़क बनी है। लेकिन सुगम आवाजाही व ज्यादा ट्रिप के चक्कर में मालवाहक बायपास रोड से आवाजाही करते हैं। इस वजह से बायपास मार्ग बदहाल हो गई है और स्टेशन पहुंचने वाले यात्री परेशान हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार रेलवे द्वारा शहरवासियों की सुविधा के लिए मानिकपुर छोर पर सेकंड एंट्री गेट की शुरूआत करते ही एसईसीएल ने उस हिस्से में कई दशक से वीरान पड़े कोल साइडिंग को फिर से शुरू कर दिया। जिसके बाद एसईसीएल के मानिकपुर खदान से निकलने वाले कोयले की साइडिंग के जरिए रेलवे के माध्यम से मालगाड़ी में परिवहन शुरू हो गया। इसके लिए प्रतिदिन करीब 200 मालवाहक खदान से कोल साइडिंग के बीच आवाजाही करते हैं। रेलवे क्षेत्र में कोल साइडिंग तक आवाजाही के लिए रेलवे ट्रैक के किनारे वैकल्पिक मार्ग होता है। शहर में भी सेकंड एंट्री गेट परिसर के पीछे रेलवे ट्रैक के किनारे वैकल्पिक मार्ग बना है, लेकिन उसमें गिनती के मालवाहक ही आवाजाही करते हैं, जबकि ज्यादातर मालवाहकों के चालक खदान से कोल साइडिंग के बीच आवाजाही के लिए मुड़ापार-इमलीडुग्गू बायपास का उपयोग करते हैं।
लगातार कोल परिवहन के कारण बायपास सड़क पर कोल डस्ट की मोटी परत जम चुकी है, ऊपर से 24 घंटे भारी वाहनों का दबाव बना रहता है, जिससे रेलवे के सेकंड एंट्री गेट को मुड़ापार की ओर से जोड़ने वाले बायपास सड़क का हाल बदहाल हो चुका है। बायपास मार्ग से सेकंड एंट्री गेट की ओर से रेलवे स्टेशन आवाजाही करने वाले यात्री सहित अन्य क्षेत्रों के लिए सफर करने वाले यात्री परेशान हो रहे हैं।
पहले शहर के बाहर बायपास सड़क न होने से कटघोरा, कुसमुंडा, गेवरा, दीपका जैसे क्षेत्रों से भारी वाहन शहर के बीच से गुजरते थे। अब सर्वमंगला नहर बायपास और बालको नगर रिंग रोड बनने से अधिकतर मालवाहक वाहनों की आवाजाही शहर के बाहर से होने लगी है। दिन में बायपास पर भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित है, केवल नो-एंट्री खुलने पर रात में ही वाहन आते-जाते हैं। वहीं, कोल साइडिंग के लिए मालवाहक मानिकपुर रेलवे फाटक के पास खड़े रहते हैं और बायपास का उपयोग साइडिंग यार्ड की तरह हो रहा है।
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