Chhattisgarh High Court , बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से किए गए निरंतर प्रयासों का वर्ष 2025 में उत्साहजनक परिणाम सामने आया है। पूरे साल के दौरान हाईकोर्ट में लंबित मामलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई, जिससे न्यायिक व्यवस्था में जनता का भरोसा और मजबूत हुआ है।
*कलेक्टर ने पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर कन्वेंशन हॉल का किया निरीक्षण*
हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, न्यायालय की त्वरित, पारदर्शी और सुलभ न्याय के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता का सीधा असर केस निपटारे की गति पर पड़ा है। विशेष रूप से पुराने और लंबे समय से लंबित मामलों की पहचान कर उनकी प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की गई, जिससे पेंडेंसी में लगातार कमी आई।
न्यायिक सुधारों से बढ़ी सुनवाई की रफ्तार
वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने केस मैनेजमेंट सिस्टम को और मजबूत किया। तकनीक के बेहतर उपयोग, ई-कोर्ट प्रणाली, डिजिटल फाइलिंग और वर्चुअल सुनवाई जैसे उपायों ने न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाया। इससे न केवल वकीलों और पक्षकारों को सुविधा मिली, बल्कि मामलों की सुनवाई और आदेश पारित करने की प्रक्रिया भी तेज हुई।
इसके साथ ही नियमित न्यायालयों के अलावा विशेष बेंचों का गठन कर चुनिंदा श्रेणी के मामलों की सुनवाई की गई। भूमि विवाद, सेवा मामलों, पारिवारिक विवादों और आपराधिक अपीलों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे आम नागरिकों को समय पर न्याय मिल सका।
मुख्य न्यायाधीश ने बताया सामूहिक प्रयासों का परिणाम
इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह सफलता न्यायाधीशों की अटूट प्रतिबद्धता, न्यायिक अधिकारियों की मेहनत और न्यायालय कर्मियों के समर्पित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक सहयोग से न्यायिक दक्षता में सुधार हुआ है और अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम करने में मदद मिली है।



