Ramakrishna Hospital Case : 3 मजदूरों की मौत के बाद बड़ा एक्शन, अस्पताल प्रबंधन पर बढ़ी कानूनी कार्रवाई

रायपुर | 23 मार्च, 2026 राजधानी रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित रामकृष्ण केयर अस्पताल (RKCH) में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान हुई तीन मजदूरों की मौत के मामले में पुलिस ने कानूनी शिकंजा कस दिया है। टिकरापारा थाना पुलिस ने इस मामले में ‘गैर इरादतन हत्या’ के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम (Atrocity Act) की धाराएं भी जोड़ दी हैं। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के हस्तक्षेप और भारी जन-आक्रोश के बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है।

घटना का घटनाक्रम: क्या हुआ था उस रात?

यह हृदयविदारक घटना मंगलवार, 17 मार्च 2026 की शाम को हुई थी।

  • जहरीली गैस का शिकार: अस्पताल परिसर के पीछे बने लगभग 20 फीट गहरे सीवरेज टैंक की सफाई के लिए चार मजदूरों को बुलाया गया था।

  • एक-एक कर खत्म हुई सांसें: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सबसे पहले एक मजदूर टैंक में उतरा और जहरीली गैस के कारण बेहोश हो गया। उसे बचाने के लिए दूसरा और फिर तीसरा मजदूर नीचे उतरा, लेकिन तीनों ही जहरीली गैस की चपेट में आ गए।

  • मृतकों की पहचान: इस हादसे में अनमोल मचकन (25), गोविंद सेंद्रे (35) और प्रशांत कुमार (32) की मौके पर ही मौत हो गई। चौथा मजदूर गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है।

पुलिस की कार्रवाई और एट्रोसिटी एक्ट

शुरुआत में पुलिस ने केवल लापरवाही का मामला दर्ज किया था, लेकिन जांच में यह सामने आया कि मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण (Safety Gears) के इतने गहरे और खतरनाक टैंक में उतारा गया था।

  1. एट्रोसिटी की धारा: चूंकि मृतक अनुसूचित जाति वर्ग से ताल्लुक रखते थे और उनसे प्रतिबंधित ‘मैनुअल स्कैवेंजिंग’ (हाथ से मैला ढोना) कराया जा रहा था, इसलिए पुलिस ने अब एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ दी हैं।

  2. आरोपी: पुलिस ने ठेकेदार किशन सोनी और अस्पताल प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

  3. प्रशासनिक रुख: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और स्पष्ट किया है कि बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर सफाई कराना एक गंभीर अपराध है।

मुआवजे और न्याय की मांग

घटना के बाद परिजनों और सामाजिक संगठनों ने अस्पताल के बाहर जमकर हंगामा किया था। भारी दबाव के बीच अस्पताल प्रबंधन ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 30 लाख रुपये का मुआवजा, बच्चों की शिक्षा के लिए 20,000 रुपये प्रति माह और परिवार को आजीवन मुफ्त स्वास्थ्य सेवा देने की घोषणा की है। हालांकि, परिजनों का कहना है कि पैसा उनकी जान की कीमत नहीं हो सकता, उन्हें दोषियों के लिए सख्त सजा चाहिए।

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