बालोद: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में कानून के रखवाले को ही निशाना बनाने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक न्यायिक मजिस्ट्रेट और उनके परिवार को डाक के माध्यम से पत्र भेजकर जान से मारने की धमकी दी गई है। आरोपियों ने न केवल मजिस्ट्रेट से 3 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी है, बल्कि पत्र भेजने वाले ने खुद को नक्सली संगठन से जुड़े होने का दावा भी किया है।
इस घटना के बाद न्यायिक जगत और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने मजिस्ट्रेट की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पत्र में लगाए ‘गलत आदेश’ देने के आरोप
मजिस्ट्रेट को भेजे गए इस धमकी भरे पत्र में बेहद आपत्तिजनक और डराने वाली बातें लिखी गई हैं। पत्र में आरोप लगाया गया है कि मजिस्ट्रेट ने अपने कार्यकाल के दौरान ‘गलत आदेश’ पारित किए हैं।
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धमकी का लहजा: पत्र में साफ तौर पर लिखा गया है कि यदि 3 करोड़ रुपये की मांग पूरी नहीं की गई, तो मजिस्ट्रेट और उनके परिवार को खत्म कर दिया जाएगा।
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नक्सली खौफ: पत्र लिखने वाले ने अपनी पहचान एक प्रतिबंधित नक्सली संगठन के सदस्य के रूप में बताई है, जिससे मामला और भी संवेदनशील हो गया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, पुलिस की पैनी नजर
मजिस्ट्रेट की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए बालोद पुलिस ने तत्काल प्रभाव से मजिस्ट्रेट के निवास और उनके आवागमन के रास्तों पर सुरक्षा बढ़ा दी है।
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मामला दर्ज: पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ रंगदारी, जान से मारने की धमकी और शासकीय कार्य में बाधा डालने जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
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डाक विभाग से पूछताछ: पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह पत्र किस डाकघर से पोस्ट किया गया था।
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साइबर सेल की मदद: पत्र की लिखावट और उसमें इस्तेमाल किए गए शब्दों के आधार पर आरोपियों की प्रोफाइलिंग की जा रही है।
क्या वाकई नक्सलियों का हाथ है?
बालोद जिला आंशिक रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्र है, लेकिन किसी न्यायिक अधिकारी को सीधे तौर पर फिरौती के लिए पत्र लिखना नक्सलियों की सामान्य कार्यशैली से अलग है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं यह किसी स्थानीय अपराधी या मजिस्ट्रेट के फैसले से असंतुष्ट व्यक्ति की साजिश तो नहीं, जिसने मामले को भटकाने के लिए नक्सलियों के नाम का सहारा लिया हो।


