“रील्स का तड़का, सट्टे का झटका”: खेमानी का काला कारोबार
हमें पता चला कि खेमानी सोशल मीडिया पर अपनी रील्स और वीडियो के ज़रिए युवाओं को आकर्षित करता था. खेमानी ने पूछताछ में शहर के कई बड़े सट्टेबाजों और बैंक खातों का खुलासा किया है, जिन्होंने इस रैकेट को चलाने में मदद की. वह मुंबई से गिरफ्तार हुआ था, जहां वह अपनी ‘इन्फ्लुएंसर’ लाइफस्टाइल के बहाने सट्टे के नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था. यह सुरक्षा और सेवा को लेकर चल रही सभी बहसों को प्लेऑफ की दौड़ जैसा ही महत्वपूर्ण बना देती है |
खेमानी की गिरफ्तारी सिर्फ़ एक ट्रेलर है, असली ‘पिक्चर’ अभी बाकी है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, खेमानी का भाई और सट्टे के कारोबार में उसका मुख्य साझीदार, करण खेमानी अब तक फरार है. उसकी तलाश में पुलिस की टीमें कई राज्यों में छापेमारी कर रही हैं. रायपुर के सट्टा बाज़ार में हलचल है कि क्या करण की गिरफ्तारी से और भी कई बड़े नाम सामने आएंगे?
यह सिर्फ़ एक इन्फ्लुएंसर की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के काले सच का पर्दाफाश है. जांच में यह भी पता चला है कि खेमानी ने कई फर्जी बैंक खातों के ज़रिए करोड़ों रुपये का ट्रांजेक्शन किया है. इस सट्टा रैकेट ने 2026 के छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक पोल खोल दी है, कि कैसे डिजिटल दौर में अपराधी सुशासन को चुनौती दे रहे है |
“गुलशन खेमानी का सट्टा नेटवर्क सिर्फ़ रायपुर तक सीमित नहीं था. उसने फर्जी आईडी और कमीशन का ऐसा ताना-बाना बुना था कि उस तक पहुँचना मुश्किल था. करण की गिरफ्तारी से इस रैकेट के सारे राज खुल जाएंगे. यह सिर्फ़ एक मैच की जीत नहीं, बल्कि पूरे टूर्नामेंट की तैयारी है.”


