अस्वच्छ व्यवसाय प्रमाण पत्र अब ऑनलाइन उपलब्ध – पात्र विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना
सुबह पेट्रोल पंप खुले तो कई वाहन चालकों के चेहरे उतर गए। कुछ लोगों ने टंकी फुल कराने की जल्दी दिखाई, लेकिन नई दरें पहले ही लागू हो चुकी थीं। गर्मी के बीच लंबी कतारें लगी रहीं। हवा में पेट्रोल की गंध थी और लोगों की बातचीत सिर्फ महंगाई पर टिक गई थी।
तेल कंपनियों ने घाटे का हवाला दिया
सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार दबाव बना रही थीं। कंपनियों के मुताबिक, उन्हें अब भी ₹25 से ₹30 प्रति लीटर तक का नुकसान झेलना पड़ रहा है। यही वजह है कि कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया। ऊर्जा बाजार के जानकार मानते हैं कि पिछले कई महीनों से तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा था। डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी ने भी लागत बढ़ाई। इस फैसले का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सब्जियों, फल और रोजमर्रा के सामान की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
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आम लोगों की जेब पर सीधा असर
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत कई शहरों में लोग पेट्रोल पंप पर बढ़ी कीमतों को लेकर चर्चा करते दिखे। ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों और डिलीवरी एजेंट्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है। दिल्ली के लक्ष्मी नगर में एक बाइक सवार ने कहा कि हर महीने का बजट पहले ही बिगड़ा हुआ है। अब रोज ऑफिस आने-जाने का खर्च और बढ़ जाएगा। पेट्रोल पंप पर मौजूद कई लोगों ने मोबाइल कैलकुलेटर निकालकर महीने का नया खर्च जोड़ना शुरू कर दिया।


