छोटी नाव से उफनदी नदी पार कर रही सैकड़ों जिंदगी:इंद्रावती घाट पर न मोटर बोट न लाइफ जैकेट, सुरक्षा इंतजाम का दावा गलत

मानसून खत्म होने को है। बस्तर की इंद्रावती नदी भी शबाब पर है। हर दिन सैकड़ों जिंदगियां लकड़ी की छोटी नाव के सहारे उफनती नदी को पार कर रही है। नाव पलटने से हादसे भी हो रहे हैं। लेकिन इस मानसून भी प्रशासन ने इंद्रावती नदी के घाटों पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए हैं।

न ही मोटर बोट की व्यवस्था है और न ही लाइफ जैकेट की। अगर हादसा होता है तो रेस्क्यू करने SDRF की भी एक ही टीम है। उनके पास भी सिर्फ एक ही मोटर बोट है। अब हादसों के बाद भी प्रशासन सबक नहीं ले रहा है।

इंद्रावती नदी पार बीजापुर, दंतेवाड़ा और नारायणपुर तीनों जिले के गांव बसे हैं। छिंदनार और बड़े करका घाट में पुल बन गया है, जिससे थोड़ी राहत है। लेकिन, बारसूर के मुचनार और कोडेनार घाट से ग्रामीण अब भी छोटी नाव के सहारे नदी पार करते हैं। इन दोनों घाट से कौशलनार, मंगनार, तुमरीगुंडा, हांदावाड़ा, कोडेनार समेत अन्य गांव के हजारों ग्रामीण जरूरत के सामानों को लाने के लिए यही नाव ही एक सहारा है।

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