बस्तर में ऐतिहासिक मोड़’ कुख्यात माओवादी पापाराव का सरेंडर, खत्म हुआ सशस्त्र संघर्ष का एक युग

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के 31 मार्च 2026 तक देश से माओवाद के खात्मे के डेडलाइन के कुछ दिन हो शेष हैं । उससे पहले कुख्यात नक्सली पापाराव के समर्पण के बाद बस्तर में सक्रिय सशस्त्र माओवाद लगभग खत्म माना जा रहा है। सरकार के अनुसार बस्तर जिले में 96 फीसदी सशस्त्र माओवादी या तो सुरक्षाबलों के हाथों मारे जा चुके हैं ,या सरेंडर करके मुख्य धारा में शामिल हो चुके हैं ।
बुधवार को डीकेजेडसी के आखिरी कमांडर पापाराव ने अपने 18 साथियों के साथ उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं जगदलपुर विधायक किरण सिंहदेव, डीजीपी अरुण देव गौतम, पुलिस उपमहानिदेशक एंटी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा, नक्सल उन्मूलन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, एडीजी सीआरपीएफ, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी., बीजापुर के पुलिस अधीक्षक सहित विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य सुरक्षा बलों के अधिकारियों के सामने हथियार डाल दिये।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि अगस्त 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा घोषित समय-सीमा 31 मार्च 2026 तक नक्सलबाद खत्म होने के अनुरूप राज्य सरकार ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत कार्य किया, जिसका सकारात्मक परिणाम आज स्पष्ट रूप से सामने आ रहा है। इसी क्रम में हाल ही में डीकेजेडसी स्तर के नक्सली पापा राव ने अपने साथियों एवं हथियारों सहित पुनर्वास कर मुख्यधारा में वापसी की है। यह घटना न केवल सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि अब नक्सल संगठन का शीर्ष ढांचा भी कमजोर पड़ चुका है।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में लगभग 3 हजार से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर पुनर्वास किया है, जिसमें सीसी मेंबर से लेकर विभिन्न स्तरों के कैडर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 2 हजार से अधिक नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है तथा लगभग 500 से अधिक नक्सली मुठभेड़ों में निष्प्रभावी (न्यूट्रलाइज) किए गए हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर 5000 से अधिक सशस्त्र कैडर में कमी आई है, जो नक्सल संगठन की रीढ़ को कमजोर करने वाला निर्णायक कारक सिद्ध हुआ है। वर्तमान स्थिति में डीकेजेडसी स्तर का कोई सक्रिय माओवादी छत्तीसगढ़ में शेष नहीं है और केवल 30 से 40 की सीमित संख्या में नक्सली उत्तर एवं दक्षिण के दूरस्थ क्षेत्रों में बचे हैं, जिनके भी शीघ्र पुनर्वास करने की संभावना व्यक्त की गई है।

डीजीपी अरुण देव गौतम ने 31आर्च 2026 की डेडलाइन पर नक्सलबाद के खात्मे का श्रेय सुरक्षाबलों को देते हुए कहा कि चूंकि सुरक्षाबलों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है इसलिए वह सुरक्षाबलों को सबसे ऊपर रखते हैं ,साथ ही उन्होंने राजनीतिक इच्छाशक्ति और तय समय में संकल्प को पूरा करने की दृढ़ता को महत्वपूर्ण बताया। डीजीपी न कहा कि तय समय सीमा पर सशस्त्र नक्सलवाद खत्म किया जायेगा।
बस्तर के सबसे पहले नक्सल लीडर बनने वाले और सबसे पहले आत्म समर्पण करने वाले पोडियम रामा उर्फ बदरन्ना भी पापाराव के आत्म समर्पण कार्यक्रम में शामिल हुए। पोडियम रामा उर्फ बदरन्ना वही व्यक्ति हैं जिन्होंने पापाराव को नक्सल संगठन में भर्ती किया था । उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में पापाराव पर तेलंगाना में प्रकरण दर्ज था ,जिस मामले के बाद पापाराव, पोडियम रामा उर्फ बदरन्ना के संपर्क आए थे और उन्होंने उसे नक्सल संगठन में शामिल किया था ।

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