विजयवाड़ा/रायपुर: आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में दशकों तक दहशत का पर्याय रहे प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के स्टेट कमेटी सदस्य चेल्लुरी नारायण राव उर्फ सोमन्ना ने पुलिस के सामने घुटने टेक दिए हैं। सोमन्ना ने यह कदम सरकार द्वारा दी गई आत्मसमर्पण की समयसीमा खत्म होने से महज 24 घंटे पहले उठाया है।
कौन है चेल्लुरी नारायण राव उर्फ सोमन्ना?
सोमन्ना माओवादी संगठन के सबसे अनुभवी और रणनीतिक नेताओं में से एक माना जाता है। वह आंध्र-ओडिशा बॉर्डर (AOB) स्टेट कमेटी का सदस्य होने के साथ-साथ स्टेट मिलिट्री कमीशन का भी हिस्सा था। मूल रूप से श्रीकाकुलम जिले का रहने वाला सोमन्ना, सेंट्रल रीजनल कमेटी (CRC) की तीसरी कंपनी के कमांडर के रूप में भी सक्रिय रहा है। उस पर लाखों रुपये का इनाम घोषित था और वह कई बड़ी नक्सली वारदातों का मास्टरमाइंड रहा है।
डेडलाइन से पहले टूटा माओवादियों का किला
गृह मंत्रालय और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। पिछले कुछ दिनों में बस्तर और सीमावर्ती इलाकों में रिकॉर्ड संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। हाल ही में खूंखार नक्सली पापा राव के सरेंडर के बाद सोमन्ना का आत्मसमर्पण संगठन के लिए ताबूत में आखिरी कील साबित हो रहा है।
बस्तर और पड़ोसी राज्यों में ‘क्लीन स्वीप’ की तैयारी
सुरक्षा बलों के अधिकारियों का कहना है कि सोमन्ना के पास संगठन की कई अहम जानकारियां हैं, जिससे आने वाले दिनों में बचे-कुचे माओवादी कैडरों पर दबाव और बढ़ेगा। पुलिस ने अपील की है कि बचे हुए 30-40 नक्सली भी इस “अंतिम अवसर” का लाभ उठाएं और हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हों।


