कोरबा जिले में पुलिसिंग को अधिक संवेदनशील, जनहितैषी एवं आधुनिक बनाने के उद्देश्य से रक्षित केंद्र कोरबा में “पुलिस व्यवहार प्रशिक्षण कार्यक्रम” आयोजित किया गया। पुलिस अधीक्षक कोरबा श्री सिद्धार्थ तिवारी के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कोरबा श्री लखन पटले द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में नगर पुलिस अधीक्षक कोरबा श्री प्रतीक चतुर्वेदी, नगर पुलिस अधीक्षक दर्री श्री विमल कुमार पाठक, पुलिस अनुभागी अधिकारी कटघोरा श्री विजय सिंह राजपूत, प्रशिक्षु डीएसपी सुश्री आस्था शर्मा सहित कोरबा जिले के समस्त थाना प्रभारी उपस्थित रहे। साथ ही जिले के विभिन्न थाना एवं चौकियों से आए पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी प्रशिक्षण में सहभागिता की।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों को थानों में आने वाले नागरिकों, फरियादियों एवं पीड़ितों के साथ सम्मानजनक एवं शालीन व्यवहार करने के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में बताया गया कि थाने में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी पीड़ा, भय या समस्या से परेशान होता है तथा वह पुलिस से सहायता और न्याय की उम्मीद लेकर आता है। ऐसे में पुलिस का व्यवहार ही जनता के मन में विभाग की छवि बनाता है।
प्रशिक्षण के दौरान “पुलिस सेवक है, मालिक नहीं” की भावना के साथ कार्य करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को बताया गया कि अच्छा व्यवहार केवल विभाग की छवि को बेहतर नहीं बनाता, बल्कि अपराध नियंत्रण एवं जनता के सहयोग को भी मजबूत करता है। जब जनता पुलिस पर विश्वास करती है, तब लोग निर्भीक होकर सूचना देते हैं, गवाह सहयोग करते हैं तथा पीड़ित खुलकर अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं।
कार्यक्रम में वीडियो प्रदर्शन के माध्यम से अच्छे एवं बुरे पुलिस व्यवहार के उदाहरण दिखाए गए तथा कुव्यवहार से संबंधित घटनाओं एवं उनके कानूनी परिणामों की जानकारी दी गई। अधिकारियों एवं कर्मचारियों को समझाया गया कि गलत व्यवहार, अभद्र भाषा, अनावश्यक दबाव अथवा शक्ति का दुरुपयोग न केवल विभागीय छवि को नुकसान पहुंचाता है बल्कि संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है।
प्रशिक्षण के दौरान संविधान के अनुच्छेद 21, BNSS 2023, BNS 2023, SC/ST Act 1989, मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देश एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी DK Basu Guidelines की जानकारी विस्तार से दी गई। गिरफ्तार व्यक्तियों के अधिकारों, महिला एवं कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता तथा कानून सम्मत पुलिसिंग के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।
अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि थानों में आने वाले प्रत्येक शिकायतकर्ता की बात धैर्यपूर्वक सुनी जाए, FIR दर्ज करने से मना न किया जाए, प्रत्येक शिकायत को विधिवत GD में दर्ज किया जाए तथा शिकायतकर्ता को समय पर कार्यवाही की जानकारी दी जाए। महिला फरियादियों एवं SC/ST वर्ग के नागरिकों के प्रति विशेष संवेदनशील व्यवहार रखने पर भी जोर दिया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में आधुनिक तकनीक, स्मार्ट पुलिसिंग एवं AI (Artificial Intelligence) आधारित तकनीकों के उपयोग पर भी विशेष बल दिया गया। अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बताया गया कि वर्तमान समय में अपराध नियंत्रण, साइबर अपराध जांच, डिजिटल निगरानी, डेटा विश्लेषण, रिकॉर्ड प्रबंधन एवं त्वरित सूचना संकलन में AI तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। साथ ही पुलिस कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं आधुनिक बनाने के लिए आईटी एवं AI आधारित संसाधनों के बेहतर उपयोग हेतु प्रेरित किया गया।
अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सोशल मीडिया के प्रभाव, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन एवं तकनीक के माध्यम से बेहतर जनसंपर्क स्थापित करने के संबंध में भी जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा “कोरबा पुलिस व्यवहार संकल्प” लिया गया, जिसमें प्रत्येक नागरिक के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करने, कानून की सीमाओं में रहकर कार्य करने तथा छत्तीसगढ़ पुलिस के आदर्श वाक्य “परित्राणाय साधूनाम्” को अपने व्यवहार एवं कार्यप्रणाली में उतारने का संकल्प लिया गया।
कोरबा पुलिस द्वारा संवेदनशील पुलिसिंग, जनविश्वास, आधुनिक तकनीक एवं AI आधारित कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने हेतु इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जा रहे हैं।


