Wednesday, January 28, 2026

सरस्वती पूजा के दिन शराब पीकर स्कूल पहुंचा टीचर, ग्रामीणों में आक्रोश

सरगुजा, छत्तीसगढ़ — विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना के दिन छत्तीसगढ़ के सरगुजा से गुरु-शिष्य परंपरा को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। लखनपुर विकासखंड के गुमगरा स्थित जूनापारा प्राइमरी स्कूल में पदस्थ शिक्षक बुद्धेश्वर दास बसंत पंचमी के पावन अवसर पर शराब के नशे में धुत होकर स्कूल पहुंचे। जब ग्रामीण और अभिभावक सरस्वती पूजन के लिए स्कूल आए, तो शिक्षक की हालत देखकर दंग रह गए।

नशे में बोले- ‘आज भगवान को दूसरा प्रसाद चढ़ा दिया’

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में शिक्षक बुद्धेश्वर दास पूरी तरह आपे से बाहर नजर आ रहे हैं। जब ग्रामीणों ने उनसे शराब पीने के बारे में पूछा, तो उन्होंने अजीबोगरीब दलीलें दीं। पहले तो उन्होंने शराब पीने से साफ मना किया और कहा कि उन्होंने सिर्फ “मध्यान्ह भोजन में दाल-भात” खाया है। हालांकि, बाद में अपनी ही धुन में उन्होंने स्वीकार किया कि आज सरस्वती पूजा है, इसलिए उन्होंने “भगवान को दूसरा प्रसाद” चढ़ा दिया है।

  • पहचान छिपाने की कोशिश: वीडियो बनाने वालों से टीचर ने अपना नाम बताने से मना कर दिया और अपनी पोस्टिंग को लेकर भी झूठ बोला।
  • आदतन शराबी: सरपंच प्रतिनिधि गुड्डू सिंह और ग्रामीणों का आरोप है कि बुद्धेश्वर दास अक्सर स्कूल में नशे की हालत में आते हैं।
  • ग्राम सभा का फैसला: टीचर की हरकतों से तंग आकर सरपंच रुपमनिया मरावी ने तुरंत ग्राम सभा बुलाई और शिक्षक को स्कूल से हटाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया।

प्रशासनिक कार्रवाई: निलंबन की तैयारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने भी कड़े तेवर अपनाए हैं। लखनपुर बीईओ (BEO) डीके गुप्ता ने बताया कि संकुल प्रभारी से मामले की प्रारंभिक जांच करा ली गई है, जिसमें शिक्षक के नशे में होने की पुष्टि हुई है।

“शिक्षक बुद्धेश्वर दास का नशे में धुत्त वीडियो और संकुल प्रभारी की रिपोर्ट मिल चुकी है। अनुशासनहीनता के इस गंभीर मामले में शिक्षक को सस्पेंड करने की सिफारिश के साथ रिपोर्ट सरगुजा डीईओ (DEO) को भेज दी गई है।”
— डीके गुप्ता, बीईओ, लखनपुर

शिक्षा के मंदिर में बढ़ती अराजकता

यह घटना केवल एक शिक्षक की व्यक्तिगत लापरवाही नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार की समझाइश के बाद भी जब सुधार नहीं हुआ, तब उन्हें ग्राम सभा जैसा कठोर कदम उठाना पड़ा। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी जल्दी ठोस कार्रवाई करता है।

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