CG BREAKING NEWS : जगदलपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में शुक्रवार, 5 सितंबर को जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चल रही थी, लेकिन एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद शेष 10 आरोपियों के खिलाफ न्यायालय ने फैसला सुनाया।
झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे बड़ी और दर्दनाक नक्सली घटनाओं में शामिल है। इस हमले में 29 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद पूरे प्रदेश में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया था।
101 गवाहों के बयान और दस्तावेज किए गए पेश
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष 101 गवाहों के बयान और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश किए। इन्हीं साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर NIA की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाया।
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लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले को झीरम घाटी हमले के मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम माना जा रहा है। अदालत के फैसले के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया और सजा को लेकर भी नजरें बनी हुई हैं।
11 आरोपियों के खिलाफ चली थी सुनवाई
इस मामले में शुरुआत में 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चल रही थी। हालांकि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई। इसके बाद बाकी 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही।
शुक्रवार को विशेष अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी माना। अदालत के फैसले के बाद मामले में अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की आगे की कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
भूपेश बघेल ने NIA जांच पर उठाए सवाल
फैसले के बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मामले की जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि NIA ने जांच में कथित तौर पर लीपापोती की है।
भूपेश बघेल ने भाजपा पर भी राजनीतिक आरोप लगाते हुए कहा कि झीरम हमले के कथित षड्यंत्रकारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उनके बयान के बाद झीरम मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है।
झीरम कांड रहा है छत्तीसगढ़ की राजनीति का बड़ा मुद्दा
झीरम घाटी नक्सली हमला लंबे समय से छत्तीसगढ़ की राजनीति और कानून व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा रहा है। घटना के बाद जांच को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं ने समय-समय पर सवाल उठाए हैं।
इस हमले में कई महत्वपूर्ण राजनीतिक नेताओं सहित अन्य लोगों की जान गई थी। घटना के बाद पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था और नक्सल चुनौती को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी।




