CG Congress सूरजपुर। सूरजपुर जिले में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की नई जिला कार्यकारिणी घोषित होते ही पार्टी के भीतर अंतर्कलह खुलकर सामने आ गई है। कार्यकारिणी गठन के कुछ ही समय बाद असंतुष्ट 17 नेताओं ने सामूहिक रूप से अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने वालों में संयुक्त महामंत्री, महामंत्री और सचिव स्तर के पदाधिकारी शामिल हैं।
कार्यकारिणी घोषित होते ही बढ़ी नाराजगी
जिला कांग्रेस कमेटी की नई कार्यकारिणी सूची सार्वजनिक होते ही असंतोष का दौर शुरू हो गया। एक के बाद एक इस्तीफों से पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी उजागर हो गई। इस्तीफा देने वालों में पूर्व विधायक खेल साय सिंह की बहू भी शामिल बताई जा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस्तीफा देने वाले अधिकांश पदाधिकारी पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव के समर्थक बताए जा रहे हैं। सभी का सामूहिक इस्तीफा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
इस्तीफे में बताए गए अलग-अलग कारण
वायरल सामूहिक इस्तीफे में पदाधिकारियों ने अलग-अलग कारणों का उल्लेख किया है। किसी ने व्यक्तिगत कारण बताए, किसी ने स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला दिया, तो किसी ने अन्य पदों पर व्यस्तता या कार्य करने में असमर्थता जताई।
हालांकि कई पदाधिकारियों ने खुलकर संगठनात्मक असंतोष भी जाहिर किया। उनका आरोप है कि जिला कार्यकारिणी में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है जो पार्टी के प्राथमिक सदस्य नहीं हैं, विधानसभा चुनाव में निष्क्रिय रहे या पार्टी के खिलाफ काम करते रहे।
जिला अध्यक्ष को सौंपा गया इस्तीफा
सभी इस्तीफे जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष शशि सिंह को सौंपे गए हैं।
प्रमुख पदाधिकारियों के इस्तीफे के कारण
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द्वारिका प्रसाद राजवाड़े – एसईसीएल में कंप्यूटर ऑपरेटर होने के कारण संगठनात्मक कार्य में असमर्थता।
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भावना सिंह – अपरिहार्य कारणों से इस्तीफा।
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विजेंद्र गोयल – गैर-प्राथमिक सदस्यों और निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को पद दिए जाने पर आपत्ति।
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पवन दीवान – सदस्यता लिए बिना लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने से नाराजगी।
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सरिता सिंह – वरिष्ठ नेताओं से सलाह लिए बिना अनुभवहीन लोगों को पद दिए जाने पर असंतोष।
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सरोज मानिकपुरी – इंटक में पदाधिकारी होने के बावजूद इस्तीफा।
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अन्य पदाधिकारियों ने भी अलग-अलग कारण बताए हैं।
संगठन के सामने चुनौती
इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि जिला कांग्रेस में कार्यकारिणी गठन के बाद असंतोष और गुटबाजी गंभीर रूप ले रही है। अब सवाल यह है कि पार्टी नेतृत्व इस स्थिति को कैसे संभालेगा और असंतुष्ट नेताओं को मनाने के लिए क्या कदम उठाएगा।



