CG Cyber Alert : रायपुर। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब शातिर ठग बड़े अधिकारियों की पहचान का दुरुपयोग कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ताजा मामला मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह से जुड़ा है, जहां ठगों ने उनके नाम और फोटो का इस्तेमाल कर फेसबुक पर फर्जी (फेक) आईडी बना ली है। इस फर्जी अकाउंट के जरिए उनके परिचितों और जान-पहचान के लोगों को मैसेज भेजकर पैसों की मांग की जा रही है। मामले की जानकारी सामने आने के बाद लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाकर कर रहे ठगी की कोशिश
जानकारी के मुताबिक, साइबर ठगों ने प्रमुख सचिव सुबोध सिंह के नाम और प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल करते हुए फेसबुक पर एक फर्जी अकाउंट तैयार किया। इसके बाद उस अकाउंट से उनके परिचितों को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई और मैसेंजर पर संपर्क कर विभिन्न बहाने बनाकर पैसों की मांग की जाने लगी।
शातिर ठग लोगों का विश्वास जीतने के लिए खुद को प्रमुख सचिव बताकर तत्काल आर्थिक सहायता की जरूरत होने जैसी बातें लिख रहे हैं, ताकि लोग बिना पुष्टि किए पैसे ट्रांसफर कर दें।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
मामले की जानकारी मिलते ही संबंधित लोगों को अलर्ट किया गया है। आम नागरिकों और परिचितों से अपील की गई है कि यदि सुबोध सिंह के नाम से कोई नया फेसबुक अकाउंट दिखाई दे या किसी भी प्रकार का आर्थिक सहयोग मांगने वाला संदेश मिले, तो उस पर भरोसा न करें।
किसी भी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर आए ऐसे संदेशों के आधार पर ऑनलाइन भुगतान करने से पहले संबंधित व्यक्ति से फोन या अन्य माध्यम से पुष्टि जरूर करनी चाहिए।
साइबर अपराधियों के निशाने पर वीआईपी प्रोफाइल
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठग अक्सर वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, डॉक्टरों, सैन्य अधिकारियों और अन्य प्रतिष्ठित लोगों की फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर लोगों को ठगने का प्रयास करते हैं। ऐसे मामलों में प्रोफाइल फोटो और नाम बिल्कुल असली जैसे होते हैं, जिससे कई लोग आसानी से भ्रमित हो जाते हैं।
इसी वजह से सोशल मीडिया पर आने वाली फ्रेंड रिक्वेस्ट और पैसों से जुड़े संदेशों की सत्यता जांचना बेहद जरूरी है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को इस तरह की फर्जी प्रोफाइल दिखाई देती है, तो उसकी तुरंत फेसबुक पर रिपोर्ट करनी चाहिए। साथ ही संबंधित साइबर थाना या पुलिस को भी इसकी सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और अन्य लोग ठगी का शिकार होने से बच सकें।



