CG News : रायपुर। छत्तीसगढ़ में नशे के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब और सख्त कार्रवाई की तैयारी में हैं। प्रदेश में वर्ष 2029 तक नशे के नेटवर्क को खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस दिशा में पुलिस मुख्यालय (PHQ) में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स गठित करने की योजना है। इसका उद्देश्य नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध बिक्री और इनके कारोबार से जुड़े संगठित गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई करना है। नई व्यवस्था के जरिए नशे के कारोबार की निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
2029 तक नशे के नेटवर्क पर कार्रवाई का लक्ष्य
छत्तीसगढ़ में नशे के अवैध कारोबार को सामाजिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती माना जाता है। नशीले पदार्थों की तस्करी के जरिए सक्रिय गिरोहों पर कार्रवाई करने के लिए पुलिस को उनके पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की जरूरत होती है।
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वर्ष 2029 तक नशे के नेटवर्क को खत्म करने का लक्ष्य इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके तहत केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी ही नहीं, बल्कि उनकी आपूर्ति करने वाले लोगों, आर्थिक लेन-देन और तस्करी के माध्यमों की पहचान पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
पुलिस मुख्यालय में बनेगी एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स
प्रस्तावित एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स पुलिस मुख्यालय में काम करेगी। इसका उद्देश्य नशे से जुड़े मामलों में कार्रवाई को अधिक संगठित और प्रभावी बनाना है। टास्क फोर्स के माध्यम से विभिन्न जिलों में सामने आने वाले मामलों की जानकारी जुटाने और जरूरत पड़ने पर समन्वित कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।
इस तरह की विशेष इकाई का प्रमुख काम नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क की पहचान करना, सूचनाओं का विश्लेषण करना और संबंधित पुलिस इकाइयों के साथ मिलकर कार्रवाई को आगे बढ़ाना हो सकता है। हालांकि, टास्क फोर्स के गठन, अधिकारियों की तैनाती और कार्यप्रणाली का विस्तृत ब्योरा आधिकारिक आदेश से स्पष्ट होगा।
तस्करों और संगठित गिरोहों पर रहेगा फोकस
नशे के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल छोटे विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती। इसके पीछे सक्रिय आपूर्तिकर्ताओं, परिवहन नेटवर्क और आर्थिक मदद पहुंचाने वालों तक पहुंचना भी जरूरी है।
प्रस्तावित टास्क फोर्स के जरिए ऐसे नेटवर्क की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई को प्राथमिकता दिए जाने की उम्मीद है। इससे अलग-अलग जिलों में फैले गिरोहों के बीच संबंधों की जांच करने में भी मदद मिल सकती है।




