CG News : रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और पंडवानी गायन को विश्वभर में नई पहचान दिलाने वाली पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई को राज्य सरकार विशेष सम्मान देने जा रही है। उनके सम्मान में दुर्ग जिले के गनियारी स्थित शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल का नाम बदलकर “डॉ. तीजन बाई शासकीय हाई-हायर सेकेंडरी विद्यालय, गनियारी” रखा जाएगा। इसकी घोषणा स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने रविवार को गनियारी में आयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान की।
श्रद्धांजलि सभा में मंत्री ने की घोषणा
रविवार को गनियारी गांव में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, जनप्रतिनिधि, कलाकार और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने अपने अद्भुत पंडवानी गायन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक कला और संस्कृति को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। उनके योगदान को देखते हुए राज्य सरकार ने उनके नाम पर विद्यालय का नामकरण करने का निर्णय लिया है।
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उन्होंने कहा कि यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति, परंपरा और लोक कला से जोड़ने का माध्यम बनेगा तथा विद्यार्थियों को भी महान कलाकारों से प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा।
लोक कला को नई पहचान दिलाने में रहा अहम योगदान
डॉ. तीजन बाई का नाम देश की महान लोक कलाकारों में शुमार किया जाता है। उन्होंने पंडवानी गायन की परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अपनी अनूठी प्रस्तुति से देश-विदेश के मंचों पर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। उनकी कला, समर्पण और संघर्ष ने हजारों कलाकारों को प्रेरित किया है।
पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का जीवन लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का प्रतीक माना जाता है।
छात्रों के लिए प्रेरणा बनेगा विद्यालय
मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि विद्यालय का नाम डॉ. तीजन बाई के नाम पर होने से यहां अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं को उनकी उपलब्धियों और संघर्ष से प्रेरणा मिलेगी। इससे लोक संस्कृति के प्रति सम्मान और जागरूकता भी बढ़ेगी। सरकार का उद्देश्य केवल नामकरण करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना भी है।
राज्य सरकार की इस घोषणा के बाद गनियारी सहित पूरे प्रदेश के कलाकारों, साहित्यकारों और संस्कृति प्रेमियों ने खुशी जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉ. तीजन बाई ने अपने जीवनभर छत्तीसगढ़ की संस्कृति को विश्व मंच तक पहुंचाने का कार्य किया है। ऐसे में उनके नाम पर विद्यालय का नामकरण उनके योगदान का सम्मान है और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी कदम साबित होगा। राज्य सरकार के इस निर्णय का विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों ने भी स्वागत किया है।



