CG Politics : रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य के विभिन्न निगम, मंडल और आयोगों से जुड़े तीन नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी और सम्मान देते हुए राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान किया है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने 2 सितंबर को आदेश जारी किया है। सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जारी आदेश के अनुसार विभिन्न निगम, मंडल और आयोगों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद पर कार्यरत पदाधिकारियों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है। इस फैसले को राज्य सरकार की ओर से संबंधित संस्थाओं के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया आदेश
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के बाद संबंधित पदाधिकारियों को राज्यमंत्री स्तर का प्रोटोकॉल और शासन के निर्धारित नियमों के अनुसार सुविधाएं मिलेंगी। राज्य सरकार समय-समय पर विभिन्न निगमों, मंडलों और आयोगों में नियुक्त पदाधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों के आधार पर विशेष दर्जा प्रदान करती रही है।
इस नए आदेश के बाद तीनों नेताओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि वे अपने-अपने विभागों और संस्थाओं के माध्यम से सरकार की योजनाओं तथा जनहित से जुड़े कार्यों को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगे।
निगम, मंडल और आयोगों के कामकाज को मिलेगी गति
छत्तीसगढ़ में निगम, मंडल और आयोग सरकार की विभिन्न योजनाओं के संचालन और आम जनता तक सरकारी सुविधाओं को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इनके अध्यक्ष और उपाध्यक्षों को राज्यमंत्री का दर्जा मिलने से संबंधित संस्थाओं की प्रशासनिक गतिविधियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकार का उद्देश्य विभिन्न शासकीय संस्थाओं के जरिए विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को बेहतर तरीके से लागू करना भी है। राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद संबंधित पदाधिकारी शासन और प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर सकेंगे।
राज्यमंत्री का दर्जा मिलने का क्या होता है मतलब?
राज्यमंत्री का दर्जा मिलने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति राज्य मंत्रिमंडल का सदस्य बन जाता है। यह दर्जा मुख्य रूप से शासन द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल और सुविधाओं के लिए दिया जाता है।
राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त पदाधिकारियों को नियमों के तहत सरकारी कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल और अन्य सुविधाएं मिल सकती हैं। हालांकि, उनके अधिकार और जिम्मेदारियां संबंधित निगम, मंडल या आयोग में उनके पद के अनुसार ही निर्धारित रहती हैं।




