CG Teachers News : रायपुर। छत्तीसगढ़ के शासकीय शिक्षकों और शिक्षा जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सर्वोच्च न्यायालय के शिक्षकों की अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता से जुड़े फैसले के परिपालन में लोक शिक्षण संचालनालय (DPI), छत्तीसगढ़ ने यह व्यवस्था स्पष्ट की है। इसके तहत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों यानी कक्षा 1 से 8वीं तक में कार्यरत ऐसे नियमित शिक्षक, जिनकी सेवानिवृत्ति में अभी 5 वर्ष या उससे अधिक का समय शेष है, उन्हें सेवा में बने रहने और भविष्य में पदोन्नति प्राप्त करने के लिए निर्धारित स्तर की शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।
इस फैसले के बाद प्रदेश के हजारों नियमित शिक्षकों के बीच TET परीक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब संबंधित शिक्षकों को अपनी सेवा और पदोन्नति से जुड़े नियमों के अनुसार परीक्षा की तैयारी करनी होगी।
5 साल या उससे अधिक सेवा बाकी है तो TET जरूरी
स्कूल शिक्षा विभाग के निर्णय के अनुसार, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर कार्यरत नियमित शिक्षकों के लिए TET उत्तीर्ण करना आवश्यक होगा। यह नियम विशेष रूप से उन शिक्षकों पर लागू होगा, जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच साल या उससे अधिक का समय बाकी है।
ऐसे शिक्षकों को संबंधित शैक्षणिक स्तर के अनुरूप शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करनी होगी। यानी प्राथमिक स्तर पर पढ़ाने वाले शिक्षकों को निर्धारित प्राथमिक स्तर की पात्रता और उच्च प्राथमिक स्तर पर कार्यरत शिक्षकों को संबंधित स्तर की पात्रता हासिल करनी होगी।
सेवा में बने रहने के लिए भी पास करनी होगी परीक्षा
इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि TET केवल पदोन्नति तक सीमित नहीं रहेगी। निर्धारित श्रेणी में आने वाले शिक्षकों के लिए सेवा में बने रहने की पात्रता से भी इसे जोड़ा गया है। ऐसे में संबंधित शिक्षकों को परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए गंभीरता से तैयारी करनी होगी।
पदोन्नति के रास्ते में भी TET की अहम भूमिका
विभागीय निर्णय के मुताबिक, संबंधित शिक्षकों को भविष्य में पदोन्नति प्राप्त करने के लिए भी निर्धारित स्तर की TET उत्तीर्ण करनी होगी। इससे शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया में पात्रता परीक्षा महत्वपूर्ण हो जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पालन में उठाया गया कदम
शिक्षा विभाग का यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शिक्षकों की अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता को लेकर दिए गए फैसले के अनुपालन से जुड़ा है। लोक शिक्षण संचालनालय ने इसी आधार पर राज्य में शिक्षकों की पात्रता को लेकर व्यवस्था स्पष्ट की है।


















































