जांजगीर-चांपा । ब्रह्मा ,विष्णु और शिव सहित सभी देवलोक में जाने की कथा बहुत ही रोमांचक हैं ,यह बात श्रीमद् देवी भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिन मां चण्डी देवी प्रांगण , मुड़पार में चल रहे कथा के दौरान व्यासपीठ पर विराजमान पंडित श्रीकांत तिवारी जी महाराज ने कही । आपने कहा ब्रह्मा जी ने विष्णु और देवाधिदेव शिव को अपने साथ लेकर देवलोक में जाने का जब निर्णय लिया, तब सभी श्रद्धालु भक्त भाव-विभोर होकर कथा श्रवण करने लगे । चौथे दिन कथा का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि वे तीनों देवलोक में पहुंचे, जहां उन्हें देवताओं ने स्वागत किया। इस अवसर पर देवताओं की पूजा-आराधना की गई और उन्हें सुंदर आसन पर बैठाया गया । इस अवसर पर महामंडलेश्वर राजेश्री डॉ रामसुंदर दास जी महंत, बालेश्वर साहू विधायक जैजैपुर, निर्मलदास महंत, प्रिंट मीडिया के शशिभूषण सोनी, डॉ बृजमोहन जागृति,कमलेश सिंह बाबा, मनोज मित्तल, प्रमोद सिंह, रामराज्य पाण्डेय, महावीर प्रसाद सोनी, प्रिंस साहू, गुलाबुद्दीन खान, दंत रोग चिकित्सक डॉक्टर श्रीमति धनेश्वरी जागृति, अनिता , सुनीता, संगीता पाण्डेय बहन , हेमा सोनी, राधिका स्वर्णकार, पार्षद श्रीमति पुष्पा सिंह सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे ।
आज श्रीमद् देवी भागवत कथा का पंचम दिवस
कथा के चतुर्थ दिन गुरुदेव राजेश्री डॉ रामसूदर दास महंत महराजश्री के चरणारबिंद को नमन करते हुए शशिभूषण सोनी ने कहा कि राजेश्री डॉ महंत गुरुदेव की महिमा अंनत हैं, उनका जीवन वास्तव में प्रेरणादायक हैं । ऐसे गुरुवर की संगत में रहने से मन और शरीर दोनों ही पुलकित हो उठते हैं। डॉ महंत जी की विद्वता और अध्यात्मिक ज्ञान का लाभ हमें भी मिले , यही ईश्वर से कामना हैं । ऐसे व्यक्ति गीता, रामायण, महाभारत, श्रीमद देवी भागवत और सुंदरकांड सहित अनेक ग्रंथों के प्रकांड विद्वान हैं ।
कथा के पांचवे दिन – देव-दानव युद्ध, देवी द्वारा देवासुर संग्राम का निवारण पर पंडित तिवारी जी विस्तार पूर्वक कथा श्रवण करवायेंगे । कथा प्रतिदिन अपराह्न तीन बजे से माता जी की कृपा तक चलेगी ।कथा के आयोजक समृद्ध कृषक कृष्ण कुमार और उनकी अर्धांगिनी श्रीमति कुसुम पाण्डेय हैं और मुख्य यजमान धर्मेन्द्र- श्रीमति ममता पाण्डेय तथा जितेन्द्र – श्रीमति वंदना पाण्डेय हैं ।
देवलोक में ब्रह्मा, विष्णु और शिव की उपस्थिति का प्रभाव
स्वर्गलोक पहुंचते ही देवताओं ने उनकी पूजा-अर्चना की और उन्हें सम्मान पूर्वक सिंहासन पर विराजमान किया ।
देवलोक में एक अद्भुत और दिव्य वातावरण का निर्माण हुआ।
ब्रह्मा, विष्णु, और शिव की उपस्थिति से देवी-देवताओं को शक्ति और आनंद की प्राप्ति होती हैं ।


